अमारा गांव के खेत हुए जलमग्न। संवाद
मछलीशहर। मधुपुर बर्जी से निकलकर अमारा गांव तक बने कुंवरपुर रजबाहा की तीन दशक बाद इस बार सफाई हुई। इसके बाद उसमें पानी छोड़ा गया तो ओवरफ्लो के कारण आसपास की 60 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। रजबाहे के टेल पर पहुंचने के बाद पानी डिस्चार्ज करने की व्यवस्था न होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सुजानगंज के मधुपुर बर्जी गांव से सरायबीका, कुंवरपुर, खरुआवा, करौरा, बरेठी होते हुए लगभग 24.800 किमी दूर तक कुंवरपुर रजबाहा तीन दशक पहले बनाया गया था। किसानों की भूमि अधिग्रहीत कर माइनर की खोदाई अमारा गांव तक ही की गई है। टेल पर बचे पानी को डिस्चार्ज कर नदी में बहाने की व्यवस्था यहां नहीं की गई। इधर कुछ माह पहले टेल तक नहर की खोदाई कर दी गई। पानी टेल पर स्थित अमारा गांव तक पहुंचने लगा है। यहां से आगे एक किमी दूर स्थित नदी तक पहुंचने की व्यवस्था न होने से खेतों में जमा हो रहा है। इससे गांव की 500 की आबादी जहां प्रभावित हो रही है वहीं, 60 एकड़ भूमि पर उगी फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। टेल की खोदाई करने के लिए विभाग से लगातार मांग की जा रही है लेकिन नहर विभाग के अधिकारी मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। नगर विभाग का कहना है कि उन्होंने जितनी भूमि अधिग्रहीत की, उतनी में खोदाई करा दी है। अब ग्राम पंचायत को काम कराना चाहिए। वहीं, प्रधान का कहना है कि उनके पास कोई ऐसा अधिकार ही नहीं हैं कि किसी किसान की भूमि ले लें और उसका मुआवजा दें। बिना मुआवजे के कोई अपनी जमीन क्यों देगा।