मतदाताओं की संख्या गांव की कुल जनसंख्या का 65 फीसदी करने के चक्कर में सूची से जितने नाम निकाले गए थे उससे कहीं अधिक आवेदन फिर जमा हो गए।
मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए जितने आवेदन ब्लाक मुख्यालयों पर जमा किए गए हैं उसे सूची में शामिल किया गया तो 65 फीसदी का आंकड़ा फिर से गड़बड़ हो जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मतदाताओं की संख्या गांव की कुल जनसंख्या के 65 से 70 फीसदी करना जिला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
आंकड़ा ठीक करने के नाम पर अगर लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं हुए तो चुनाव से पहले ही गांवों में सिर फुटौवल से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
मतदाताओं की संख्या जनसंख्या के 65 फीसदी करने के चक्कर में तमाम मतदाताओं का नाम काट दिया गया है। जबकि कई मृतकों के नाम सूची से नहीं निकाले गए। जो विदेश में हैं या मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में रह रहे हैं
उनका नाम सूची से नहीं निकाला गया। जबकि गांव में रहने वालों का नाम काट दिया गया। सूची का प्रकाशन हुआ तो नाम गायब देख कर गांवों में नया बखेड़ा खड़ा हो गया। कोई बीएलओ की करतूत मान रहा है तो कोई विपक्ष की
साजिश मान रहा है। मतदाताओं में उपजे असंतोष को देखते हुए जिला प्रशासन ने छूटे हुए लोगों से आवेदन लेने के लिए ब्लाक मुख्यालयों पर काउंटर लगाये थे। प्रत्येक गांव में 50-50 की संख्या में आवेदन फार्म दिए गए थे लेकिन
आवेदकों की संख्या अधिक हो गई तो फार्म को फोटोस्टेट कराकर जमा करने की छूट दे दी गई। इसका नतीजा हुआ कि जितने नाम सूची से काटे गए थे उससे अधिक आवेदन फिर जमा हो गए। अब मतदाताओं का प्रतिशत जनसंख्या के 65 फीसदी करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
उधर, महराजगंज विकास खंड के ग्राम सभा बाभनपुर में मतदाताओं नेे सूची में गड़बड़ी किए जाने के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर विरोध जताया। गुरुवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया कि दूसरे
गांव के लोगों का नाम बाभनपुर की मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया है। उपजिलाधिकारी पुष्पराज सिंह को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच करवाकर कार्रवाई किए जाने की मांग की। ज्ञापन में कहा कि ग्राम बेसार निवासी राजबहादुर
पुत्र रामलखन द्वारा फर्जी प्रविष्ट के आधार ग्राम बाभनपुर की मतदाता सूची में अपना तथा अपने पूरे परिवार का नाम दर्ज करवा लिया है। जबकि राजबहादुर के नाम से बाभनपुर गांव में न कोई जमीन है और न ही रिहायसी मकान है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि नाम सूची से नहीं निकाला गया तो गांव के लोग धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।