मछलीशहर। संपूर्ण कार्तिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है। इसमें कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी जिस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं वह तिथि धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्वपूर्ण है। इस वर्ष प्रबोधनी एकादशी व्रत चार नवंबर को है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा एवं तुलसी की पूजा से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा श्रवण और शालिग्राम का पूजन विशेष फलदाई है। ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने स्कंदपुराण का उद्धरण देते हुए बताया है कि जो मनुष्य कमलापति भगवान विष्णु की कमल के पुष्प से पूजा करता है, उसके करोड़ों जन्मों के पापों का शमन हो जाता है। सात समुद्रों तक की पृथ्वी का दान करने से जो फल प्राप्त होता है, शालिग्राम शिला के दान करने से मनुष्य उसी फल को पा लेता है, जो मनुष्य कार्तिक मास के हरि प्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णु के आगे कपूर का दीपक जलाता है, उसके कुल में उत्पन्न हुए सभी मनुष्य भगवान विष्णु के प्रिय भक्त होते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं। शास्त्रों में देव उठानी एकादशी का दिन पुनीत कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा से जाग जाते हैं एवं शालिग्राम तुलसी विवाह का पुण्यदाई कार्यक्रम किए जाते हैं। तुलसी विवाह उपरांत से मांगलिक कार्य के फलदाई मुहूर्तों का संयोग मिलने से प्रारंभ हो जाता हैं, लेकिन इस वर्ष शुक्रास्त के कारण मांगलिक कार्य के मुहूर्त के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। 29 सितंबर से शुक्र अस्त चल रहे हैं, जो 20/21 नवंबर को उदय होगे तो शहनाई बजेगी। 10, 15, 16, 22 को विवाह मुहूर्त हैं। मार्च 2023 में 8 व 9 को विवाह मुहूर्त हैं।