प्रबोधिनी एकादशी परंपरागत ढंग से मनाई गई। रविवार को किसानों ने खेत में गन्ने की पूजा कर सुख-सौभाग्य की कामना की। महिलाओं ने दिन भर व्रत रखकर शाम को तुलसी विवाह का आयोजन किया।
इस दौरान घरों में चहल-पहल रही। कु छ लोगों ने अपने घरों को झालरों से भी सजाया। बच्चों ने पटाखे फोडे़। प्रबोधिनी एकादशी के दिन गन्ने की नई फसल की कटाई का काम शुरू करने की परंपरा है।
इसके पहले खेत में गन्ने के पौधे को हाथ नहीं लगाया जाता। इसी दिन से नए गुड़ का सेवन आरंभ करते हैं। एकादशी के दिन चावल नहीं खाने का भी रिवाज है। रविवार को प्रबोधिनी एकादशी को लेकर चारों तरफ चहल पहल रहा।
घरों को झालर से जताया गया। बच्चों ने आतिशबाजी भी की। महिलाओं ने दिन भर व्रत रखकर घर-घर में तुलसी विवाह का आयोजन किया गया।
महिलाओं ने माता तुलसी का विधिविधान से विवाह किया और बच्चों को खाना खिलाया। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। एकादशी को लेकर बाजार में भी चहल-पहल बढ़ गई थी।
गन्ने के अलावा पूजा और व्रत के सामान खरीदने के लिए बाजारों में भीड़ उमड़ी। नगरीय इलाके में गन्ना 15 से 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिका।
इसी तरह व्रतियों के फलाहार के लिए इस्तेमाल होने वाला कंदा और सिंघाड़ा भी 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिला। तुलसी पूजन के लिए मंदिरों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान महिलाओं ने मंगल गाए और लोक कल्याण की कामना की। पूजा के सामान पर महंगाई का असर भी देखा गया।