जौनपुर। अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम काशी प्रसाद सिंह यादव की अदालत ने बुधवार को डीएनए जांच और पीड़िता के पहले बयान को आधार बनाकर दुष्कर्म मामले में राहुल गौतम को दोषी करार दिया। साथ ही 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मामले में पीड़िता और उसकी मां अपने बयान से मुकर गई थीं, लेकिन अदालत ने दोषी को किसी तरह की राहत नहीं दी। साक्ष्यों के आधार पर ही अदालत ने छह महीने बाद ही फैसला सुना दिया।
अभियोजन के मुताबिक पीड़िता की मां ने नौ जुलाई 2023 को सरायख्वाजा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि राहुल गौतम ने 17 वर्षीय बेटी को शादी का झांसा दिया और घर से भगा ले गया। बाद में गांव के बाहर छोड़कर चला गया। पीड़िता की मेडिकल जांच हुई। उसने पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि राहुल गौतम उसके पीछे पड़ा था। बात नहीं करने पर छत से कूदकर जान देने की धमकी देता था। शादी का झांसा देकर आठ जुलाई 2023 को उसके साथ दुष्कर्म किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता के कपड़े कब्जे में लिया था। बाद में डीएनए जांच कराई गई। राहुल का भी चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। दोनों की डीएनए प्रोफाइल विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजी गई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस डायरी दाखिल की। लेकिन, पीड़िता और उसकी मां अदालत में अपने पहले के बयान से मुकर गईं। पीड़िता ने दुष्कर्म से इन्कार किया। इस पर कोर्ट ने दोनों को पक्षद्रोही घोषित कर दिया। अदालत ने डीएनए जांच और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए पीड़िता के पहले बयान को साक्ष्य माना है। अभियोजन पक्ष से सरकारी वकील राजेश कुमार उपाध्याय और कमलेश राय ने पैरवी की।