बुधवार को हुई बारिश से बरईपार बाजार में लगा पानी।
मंगलवार की रात हुई झमाझम बारिश से खेतों में पानी लग गया। जून माह में कई सालों बाद हुई तेज बारिश ने धरती की प्यास बुझा दी। इस बारिश को खरीफ की फसलों के लिए बर्दान माना जा रहा है। इससे किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। किसानों की माने तो करीब 12 साल बाद जून महीने में इतनी अच्छी बारिश हुई है।
खेतों में पानी लगने से जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है वे धान की रोपाई भी शुरू कर दिए। अद्रा नक्षत्र के पहले दिन ही हुई बारिश से अनुभवी किसान इस बात का भी अनुमान लगा रहे हैं कि इस साल पूरे सीजन अच्छी बारिश होगी।
किसानों का यह अनुमान सही हुआ तो न सिर्फ खरीफ की फसलों की पैदावार बढ़ेगी बल्कि तेजी से खाली हो रही धरती की कोख भी पानी से भर जाएगी।
जिससे पेयजल संकट भी दूर होगा। घाघ ने भी कहा है कि तेरह कातिक तीन अषाढ़, जे न बोवै जाय बाजार। यानी खरीफ की खेती तीन दिन में ही होती है । लेकिन यदि समय से बरसात न हो या फिर रुक रुक कर हो तो मिट्टी का सोधा पन ग़ायब हो जाता है । सिकरारा क्षेत्र के बघौरा के प्रगतिशील किसान हृदय नारायण उपाध्याय की माने तो करीब डेढ़ दशक बाद ऐसी बारिश हुई है।
जिससे खरीफ की फसल अच्छी होने की पूरी सम्भावना है। मक्का,ज्वार,बाजरा,अरहर,धान की नर्सरी और सामयिक सब्जियों के लिए यह बारिश बर्दान साबित होगी। केराकत प्रतिनिधि के मुताबिक झूम के हुई बारिश से किसानो के चेहरे खिले रहे वही दूकानदारों के चेहरों पर भी ख़ुशी दिखी। उमस भरी गर्मी से भी लोगों को बड़ी राहत मिल गई है। महराजगंज प्रतिनिधि के अनुसार खेतो मे पानी भर जाने से किसान खेत की मेडबन्दी मे जुट गए हैं।
जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार थी वे रोपाई भी करना शुरू कर दिए। बसहरा के मिठाईलाल, चरियाही के रामसजीवन यादव ने भी धान की रोपाई शुरू कर दिया। अमारी गांव के किसान किसान शम्भू सिंह का कहना है कि कई साल बाद जून माह में अच्छी बारिश हुई है।