जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के परीक्षा समिति की बैठक में तय हुआ कि शोध परियोजना का मूल्यांकन अधिकतम 100 अंकों में किया जाएगा। विश्वविद्यालय से नामित बाह्यय परीक्षकों को मूल्यांकन के लिए पारिश्रमिक दिया जाएगा।
परीक्षा समिति ने तय किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत संचालित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के मुख्य शोध परियोजना का मूल्यांकन पूर्व की भांति अधिकतम 100 अंकों में किया जाएगा। इसका मूल्यांकन संगत अकादमिक वर्ष (स्नातकोत्तर के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) के वर्षांत विश्वविद्यालय से नामित परीक्षक मंडल (शोध सुपरवाइजर एवं वाह्य परीक्षक) द्वारा किया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी अपनी इस शोध परियोजना में से कोई शोध पत्र सूची के जर्नल में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के दौरान प्रकाशित करवाता है तो उसे शोध परियोजना के मूल्यांकन (पूर्णांक 100 में से) में 25 अंक तक अतिरिक्त अंक दिए जा सकते हैं। परंतु प्राप्तांक अधिकतम 100 अंक ही होंगें। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत संचालित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के मुख्य शोध परियोजना का मूल्यांकन विश्वविद्यालय से नामित वाह्य परीक्षकों से कराया जाएगा। शोध परियोजना के मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा नामित वाह्य परीक्षकों को स्नातकोत्तर स्तर की प्रायोगिक परीक्षा के लिए पारिश्रमिक दिया जाएगा।