महराजगंज:: कथा कहते स्वामी उमादास महाराज। संवाद
महराजगंज। सत्य बोलने वालों का संबंध जीवन में कभी नहीं टूटता। यह बातें अयोध्या धाम के कथा व्यास स्वामी उमादास महाराज ने भटपुरा स्थित बाबा परमहंस विद्यालय प्रांगण में आयोजित श्री राम कथा महोत्सव लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में भक्तों के बीच प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जब सीता का भेष धारण कर माता सती राम की परीक्षा लेने गईं, तब राम ने सती को तुरंत पहचान लिया। उनको हाथ जोड़कर प्रणाम किया। अपना भेद खुल जाने पर मां सती लज्जित होते हुए वहां से अंतर्ध्यान होकर शिवजी के पास पहुंची। उधर शिवजी भी सती के इस कृत्य से दुखी हो जाते हैं और राम नाम का सुमिरन करने लगते हैं। तब सती ने शिवजी से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी। स्वामी उमादास महाराज श्रीराम के अवतार की कथा सुनाई। मंच पर श्रीराम जन्म का दृश्य प्रस्तुत होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ राम जन्मोत्सव मनाया। कथा में बताया कि रावण के बढ़ते अत्याचारों और धरती पर अधर्म के बढ़ते बोझ को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के घर राम रूप में अवतार लिया। मुख्य यजमान रजनी धर्मेंद्र सिंह ने वेदी पूजन कराया। आयोजक समिति के सूर्य प्रताप सिंह, शैलेंद्र सिंह, व्यवस्थापक पत्रकार अखिलेश यादव, विनोद सिंह, शेर बहादुर यादव आदि मौजूद रहे।