फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मरीजों का बढ़ने लगा दबाव तो अब होम आइसोलेशन पर जोर.

विज्ञापन
विज्ञापन
जौनपुर। कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बाद अब प्रशासन ने भी मरीजों को अस्पताल में रखने की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब पॉजिटिव मिलने वाले गंभीर मरीजों को छोड़ ज्यादातर को होम आइसोलेशन में ही रखा जा रहा है। समय-समय पर फोन से चिकित्साकर्मी उनसे संपर्क कर हाल-चाल ले रहे हैं। अब तक साढ़े चार सौ से अधिक मरीज होम आइसोलेट किए जा चुके हैं, जबकि अस्पतालों में रखे गए मरीजों की संख्या इससे कम है। नई व्यवस्था से प्रशासन को अस्पताल में दुर्व्यवस्था की शिकायतों को लेकर हंगामे से राहत मिली है तो मरीज भी घर पर ही रहकर अपनी मर्जी से खान-पान को लेकर सहूलियत महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन

कोविड-19 का संक्रमण शुरू होने के बाद प्रशासन ने पॉजिटिव मरीजों को परिवार से अलग कर अपनी निगरानी में रखने के लिए एल-1, एल-2 श्रेणी के अस्पताल तैयार किए थे। सामान्य लक्षण या बिना लक्षण वाले मरीजों को पूविवि और मटियारी के आश्रम पद्धति विद्यालय में बने एल-1 अस्पताल में रखा जा रहा था। सिर्फ गंभीर श्रेणी के मरीज ही एल-2 अस्पताल भेजे जा रहे थे। पॉजिटिव मरीज को 24 घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाने का निर्देश था। मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ प्रशासन के सामने चुनौती भी बढ़ती जा रही थी। मरीज भी वहां की व्यवस्थाओं को लेकर कई बार अपना असंतोष जताते हुए हंगामा कर चुके हैं। अब होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों के साथ प्रशासन को भी राहत मिली है। नए मिल रहे मरीजों में ज्यादातर को होम आइसोलेशन में ही रखा जा रहा है। मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो दोनों एल-1ब अस्पताल में 295, एल-2 अस्पताल में 25 और अतिरिक्त सुविधा के लिए शुल्क देकर एल-1 प्लस अस्पताल में 16 मरीज रह रहे हैं। इनके सापेक्ष होम आइसोलेशन में 425 मरीजों को रखा गया है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि होम आइसोलेशन की सुविधा से निश्चित रुप से परेशानी कुछ कम हुई है। मरीज भी घर में अपनी मर्जी से खान-पान कर ले रहे हैं। अब बिना लक्षण वाले उन सभी मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है, जिनके घरों में दो शौचालय और क्वारंटीन में रहने के लिए एक अतिरिक्त कमरा है। वहां मरीज की देखभाल के लिए किसी एक जिम्मेदार व्यक्ति का होना भी जरुरी है। मरीजों से सहमति पत्र भरवाने के बाद उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की अनुमति दी जा रही है। फोन के माध्यम से उनकी निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य टीम भी दो-तीन दिन पर जाकर जांच कर रही है। गंभीर मरीज को ही अस्पताल में रखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें