करंजाकला। विकास खंड में कांशीराम आवास योजना के तहत बने एक हजार आवास 15 साल बाद भी अधूरे हैं। बजट नहीं मिलने से साल 2008 में शुरू हुआ निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया। सिर्फ बिल्डिंग ही खड़ी हो पाई, जो अब जर्जर हो गई। दरवाजे-खिड़कियां लगाईं गईं थी वो भी चोर उखाड़ ले गए।वहीं आवास की आस लगाए गरीबों को छत नसीब नहीं हो सकी। लोग कच्ची दीवारें खड़ी कर उन पर झोपड़ी व पन्नी डालकर रहने को मजबूर हैं।
कांशीराम आवास योजना के तहत करंजाकला में बने आवास इस समय खंडहर बन गए हैं। 2008 में शुरू हुआ आवासों का निर्माण 2012 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही रुक गया था। आवास निर्माण की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद के पास थी। सरकार बदलते ही बजट की दिक्कत के कारण इन आवासों का निर्माण बंद कर दिया गया। इन आवासों में लगे लोहे की चौखट और खिड़कियां चोरी हो चुकी हैं। वहीं आसपास के ग्रामीण अब इन आवासों को शौचालय के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। अराजक तत्वों ने भी भवन को अपना अड्डा बना लिया है। प्रशासन की ओर से कई बार कार्रवाई कर ऐसे लोगों की धर पकड़ की गई। फिर भी कोई असर नहीं हुआ। अगर इन आवासों का निर्माण किया जाता तो निश्चित रूप से सैकड़ों परिवारों को सर ढकने के लिए छत मिल जाती।
मामला संज्ञान में है। अधूरे आवासों की जांच कराई जाएगी। बजट के लिए जल्द प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएग। अभियान चलाकर आवासों का इस्तेमाल कर रहे अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी