क्षेत्र के कुंवरपुर ग्राम पंचायत में रामलीला समिति की ओर से पहले दिन नारद मोह का मंचन हुआ। शीलनगर के राजा की पुत्री पर नारद सम्मोहित हो गए। सुंदर स्वरूप पाने के लिए उन्होंने तप शुरू कर दिया तो देवराज इंद्र घबरा गए। उन्होंने अप्सराओं और कामदेव को तपस्या भंग करने का आदेश देकर भेज दिया। कामदेव ने अपनी माया फैलाई और धनुष से पुष्पवर्षा की। अपसराओं ने नृत्य करके नारद का ध्यान भंग कर दिया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त के मोह को देखा तो उन्होंने सुंदर रूप मांगने वाले नारद को वानर का रूप दे दिया। इससे उनकी शादी नहीं हुई। रामलीला मंचन के दौरान नारद की भूमिका उमेश चंद्र मिश्रा, कामदेव की भूमिका सूरज उपाध्याय, विष्णु भगवान की भूमिका लकी, विश्व मोहिनी की भूमिका में कार्तिक सिंह ने निभाई। रामलीला के संस्थापक श्रीश्री 108 फलाहारी महाराज ने वर्ष 1885 से रामलीला मंचन की शुरुआत की थी, जो आज तक बरकरार है।