जौनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने के लिए गाइड लाइन भले ही बदल जाए, लेकिन आरक्षित पदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं आएगा। एससी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित पदों की संख्या यथावत रहेगी। आरक्षण का भी सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ेगा, जिन्हें सामान्य से सीधे अनुसूचित या अनुसूचित से सामान्य कर दिया गया था। ग्राम पंचायतों में ऐसे 200 सीट होंगी तो बीडीसी सदस्य के साढ़े तीन सौ पदों का आरक्षण प्रभावित होगा।
जिले में 1740 ग्राम प्रधान, 2027 बीडीसी सदस्य, 21544 ग्राम पंचायत सदस्य और 83 जिला पंचायत सदस्य पद हैं। आरक्षण व्यवस्था के तहत 21 फीसदी सीटें अनुसूचित और 27 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होती हैं। हर वर्ग की आरक्षित सीटों में भी 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए होगा। इसके बाद बची हुई सीटें ही अनारक्षित रखी जाएंगी। यह फार्मूला हर बार लागू होना है, फिर चाहे आधार वर्ष 2015 हो या वर्ष 1995। पूर्व में इसी मानक से सीटें तय की गई थी। अब नई गाइड लाइन में भी इसका ध्यान रखा जाएगा। डीपीआरओ कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण में काफी हद तक वर्ष 2000 के अनुसार ही सीटों के आरक्षण की व्यवस्था हो सकती है, लेकिन इस बीच आबादी में अंतर के कारण कुछ प्रभाव पड़ेगा। नए सिरे से आरक्षण तय करने के लिए शासन की गाइड लाइन का इंतजार किया जा रहा है।
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जिला पंचायत सदस्य के 15 से 20 सीटों पर हो सकता है बदलाव
जौनपुर। कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण हुआ तो जिला पंचायत सदस्य के 15 से 20 सीटों पर बदलाव हो सकता है। इसके पहले हुए आरक्षण के दौरान जिले में जिला पंचायत सदस्य के कुल 83 पद हैं, जिसमें अनुसूचित जाति महिला के लिए सात, अनुसूचित जाति के लिए 12, अन्य पिछड़ा महिला वर्ग के लिए आठ, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14, महिला के लिए 13 और अनारक्षित के लिए 29 सीटे की गई थी, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद अब लोग गाइड लाइन आने का इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण की बात स्पष्ट हो चुकी है, लेकिन इसका निर्धारण कैसे होगा इसकी जानकारी गाइड लाइन आने पर ही हो पाएगी। आरक्षण की प्रक्रिया पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। नए गाइड लाइन का इंतजार हो रहा है। -संतोष कुमार, जिला पंचायत अधिकारी।