जौनपुर। नगर के शाही पुल पर पुरातत्व विभाग की करीब 25 दुकानों से 70 लाख रुपये किराया वसूली का मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। इसके लिए एडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है। इनके द्वारा किराए का निर्धारण किया गया। इन दुकानदारों की तरफ से 30 साल से किसी प्रकार का किराया नहीं दिया गया था। प्रशासन की तरफ से बकाए का कुल 89 लाख रुपये किराया तय किया गया। किराया जमा नहीं करने पर शाही पुल की पुरातत्व विभाग की 25 दुकानों को प्रशासन ने जुलाई में पहले खाली करवा दिया था। अवैध तरीके से काबिज इन दुकानदारों पर औसत तीन-तीन लाख रुपये का बकाया निर्धारित किया गया था। कुछ दुकानदारों ने रकम जमा कर दी। उनको दुकानें खोलने की अनुमति दे दी गई। बकाए और किराए का निर्धारण करने के लिए एडीएम की अध्यक्षता में टीम का गठित की गई थी। किराए की दरें तय कर दी गई हैं। तीन तरह का किराया तय किया गया है। 800, 1200 व 1500 रुपये मासिक किराया दुकानदारों से लिया जाएगा। इसको किस खाते में जमा किया जाएगा, इसके लिए प्रशासन पुरातत्व विभाग से पत्राचार करेगा। अगर पुरातत्व विभाग किराया अगर प्रशासन के खाते में देगा तो उससे विकास कार्य कराए जाएंगे। प्रशासन ने दुकानदारों को राहत देते हुए किराए की दरें कम की हैं। उसी के हिसाब से बकाए में भी कटौती की गई। अधिकारियों का कहना है कि 89 लाख बकाए में से 10 लाख रुपये पहले जमा हो चुके हैं। शेष राशि भी वसूल की जाएगी।