महराजगंज:-कथा का रसपान कराते व्यास स्वामी उमादास महाराज। संवाद
जौनपुर। महराजगंज के भटपुरा में आयोजित श्री रामकथा में अयोध्या धाम से आए कथाव्यास स्वामी उमादास महाराज ने कहा कि भगवान राम और जानकी का विवाह, जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। यही हमारे मानव तन का भी एकमात्र लक्ष्य है। यह प्रकृति हमारी मां है और इसी से हमारा जीवन गतिमान है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को जीवन जीने की सबसे उत्तम शैली रामचरित्र से सीखना चाहिए। रामनाम की महिमा को गाते हुए उन्होंने बताया जो रामनाम का जाप करता है। उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है। राम-सीता विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि शिव-धनुष को राजा जनक के महल में सीता ने सफाई करते हुए दूसरी जगह रख दिया। राजा जनक ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने वाले से ही सीता का विवाह कराने की घोषणा की। सीता स्वयंवर में कोई भी राजा धनुष को नहीं उठा सका। तब श्री राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर धनुष उठाई। प्रत्यंचा चढ़ाते ही यह टूट गया। सीता जी ने जैसे ही प्रभु श्रीराम को वरमाला डाली, देवता फूलों की वर्षा करने लगे। इस मौके पर मुख्य यजमान रजनी धर्मेंद्र सिंह, शेर बहादुर यादव, विकास सिंह, विशाल, पीहू, शौर्य, शुभम, कृष्ण कुमार यादव आदि रहे।