जौनपुर। प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के सपने को जिले की महिलाएं साकार कर रही हैं। कोरोना के असर से जब लोगों का रोजगार ठप हो रहा था, तब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वह आजीविका के विभिन्न माध्यमों से जुड़कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में महिला समूहों ने 80 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है। यह आमदनी भी तब है, जब वर्ष का अधिकांश समय कोरोना से प्रभावित रहा। अब नए सत्र में नई ऊर्जा के साथ महिलाएं सफलता की नई कहानी गढ़ने में जुट गई हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जिले में अप्रैल 2020 से लागू किया गया। हालांकि कई महिला समूहों का गठन इसके पहले से भी था, लेकिन प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के अभाव में वह निष्क्रिय थे। मिशन से जुड़कर महिलाओं ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। कोरोना काल में मास्क बनाना, ड्रेस सिलना हो या कोटे की दुकानों का संचालन, आंगनबाड़ी केंद्रों को सूखा राशन वितरण, बिजली बिल की वसूली, प्रेरणा कैंटीन का संचालन सहित अन्य कार्य। महिला समूहों ने हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहराया है। उनकी मेहनत और लगन ने गांवों की उन तमाम महिलाओं में उम्मीद की नई किरण जगाई है, जो खुद को उपेक्षित मानकर बैठी हैं। आजीविका जुटाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। जिले में कुल 4517 महिला समूह गठित हैं। इसमें 1450 को रिवाल्विंग फंड जारी हुआ है, जबकि करीब 2885 समूह की महिलाएं अन्य कार्यों से जुड़ी हैं। आंकड़ों की मानें तो वित्तीय सत्र में 80 लाख से अधिक की आमदनी अर्जित की है। राज्य स्तर पर यह मुनाफा 545 करोड़ का है।
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महिला समूहों ने ऐसे की कमाई::
कार्य: मुनाफा
स्कूल ड्रेस सिलाई: 40 लाख
मास्क: 75 हजार
सूखा राशन वितरण: 28 लाख
जनसूचना पट्ट: 4.50 लाख
कोटे की दुकान: 3.50 लाख
प्रेरणा कैंटीन: 04.15 लाख
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फिर भी राज्य रैंकिंग में रह गए पीछे
जौनपुर। महिला समूहों ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर भले ही अच्छी आमदनी अर्जित कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, मगर राज्य स्तर की रैंकिंग में जनपद की स्थिति संतोषजनक नहीं है। रैंकिंग में जिले कों 54वां स्थान मिला है। पूर्वांचल के दस जिलों में भदोही के बाद सबसे खराब स्थिति जौनपुर की ही है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी ने शीर्ष चार में जगह बनाई है तो देश के अति पिछड़े जिलों में शुमार सोनभद्र और चंदौली भी टॉप-20 में शामिल होने में कामयाब रहे हैं। जिले की रैंकिंग पिछड़ने के पीछे लॉक डाउन के असर और बैंकों के असहयोग को कारण बताया जा रहा है। जिला मिशन प्रबंधक (आजीविका) विनीत चतुर्वेदी का कहना है कि अन्य जिलों में योजना पहले से ही लागू है, जबकि जौनपुर में इसी सत्र से शुरुआत हुई। लॉक डाउन के कारण शुरुआती चार माह तक काम ठप रहा। बावजूद अंतिम महीनों में महिलाओं ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। 2016 समूहों के लक्ष्य के सापेक्ष ढाई हजार नए समूह गठित किए गए। खाता खोलने, क्रेडिट लिंक कराने सहित कई अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शन अच्छा है। सामुदायिक शौचालय का संचालन भी अभी शुरू नहीं हुआ है। रैंकिंग का आंकलन कई मानकों पर हुआ है। इस बार रैंकिंग में सुधार नजर आएगा।
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पूर्वांचल के अन्य जिलों की रैंकिंग::
वाराणसी: 4
सोनभद्र: 11
चंदौली: 18
मिर्जापुर: 36
मऊ: 41
बलिया: 45
गाजीपुर: 50
आजमगढ़: 53
जौनपुर: 54
भदोही: 62
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महज आठ माह में ही जिले की महिला समूहों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराने में बैंकों का पर्याप्त सहयोग मिला होता तो स्थिति और अच्छी होती। नए सत्र में नई ऊर्जा के साथ काम करते हुए सभी समूहों को सक्रिय किया जाएगा। इससे रैंकिंग में सुधार नजर आएगा। -भूपेंद्र सिंह, प्रभारी एनआरएलएम।
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जौनपुर में योजना देर से शुरू हुई, बावजूद वहां की महिला समूहों की प्रगति काफी अच्छी है। लक्ष्य से अधिक समूह गठित हुए हैं। इसका असर आगामी वित्तीय वर्ष में दिखेगा। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर महिलाएं प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के सपने को साकार कर रही हैं। -आचार्य शेखर, राज्य परियोजना प्रबंधक, ग्रामीण आजीविका मिशन।