जौनपुर। शिक्षण संस्थाओं में बुधवार को हिंदी दिवस मनाया गया। गोष्ठियों में हिंदी की महत्ता बखानी गई और उसे समृद्ध बनाने के सुझाव दिए गए। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी की खुशबू विश्व भर में भी फैल रही है और भारत का मान बढ़ा है।
पूविवि के स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय में आयोजित संगोष्ठी कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि कई देशों में हिंदी बोलने वालों की संख्या में बढ़ रही है। अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई हो रही है। विशिष्ट अतिथि टीडी कॉलेज की प्रो. वंदना दूबे ने कहा कि हिंदी का साहित्य निरंतर समृद्ध हो रहा है। प्रो. मानस पांडेय, प्रो. रवि प्रकाश, डॉ. मनोज मिश्र एवं डॉ. रसिकेश ने काव्य पाठ किया। वित्त अधिकारी संजय कुमार राय, कुलसचिव महेंद्र कुमार ने विचार व्यक्त किए। संयोजक डॉ. आलोक गुप्ता, संचालन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील कुमार ने किया।
टीडी कॉलेज में हिंदी का बढ़ता दायरा विषयक पर संगोष्ठी में विभागाध्यक्ष प्रो. सुषमा सिंह ने कहा कि हिंदी भारत की जन भाषा है। प्रो. राजदेव दुबे ने कहा कि हिंदी का दायरा विस्तृत है। डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, डॉ.ओमप्रकाश सिंह, डॉ.वंदना सिंह, डॉ. अंजना सिंह ने विचार व्यक्त किए।
राजा श्रीकृष्ण दत्त पीजी कालेज में विभागाध्यक्ष डॉ. सुधा सिंह ने कहा कि जब फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देश अपनी मातृभाषा के माध्यम से अपने राष्ट्र को विकसित कर सकते है। प्राचार्य प्रो. शम्भू राम, उपप्राचार्य प्रो. अखिलेश्वर शुक्ला, डॉ. मनेाज वत्स, डॉ. मधु पाठक, डॉ. रागिनी राय, डॉ. रमेशचन्द्र सोनी, डॉ. मधु पाठक, डॉ रागिनी राय ने विचार व्यक्त किए।
आदर्श भारती महाविद्यालय में खेतासराय में प्राध्यापक मुकेश कुमार पाठक, डॉ. अजय कुमार तिवारी, चंद्रवीर सिंह, अखिलेश चंद्र मिश्र, डॉ. श्यामजीत पांडेय, डॉ. विजय कुमार पांडेय, डॉ. गिरीशचंद्र मिश्र, प्राचार्य विनय कुमार सिंह, विकास पांडेय ने विचार व्यक्त किए।
सुजानगंज क्षेत्र के थलोई स्थित रघुवीर महाविद्यालय में हरिवंश शुक्ल , योगिनी, काजोल पाठक, राजेंद्र प्रसाद पांडेय (गड़बड़), शिवानंद चौबे, अमरनाथ सिंह (मोही), आशा साहनी ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता रमाराम पांडेय ने की। प्रबंधक डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी,जयप्रकाश त्रिपाठी मौजूद रहे। मुफ्तीगंज के डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय में हुई भाषण प्रतियोगिता में काजल विश्वकर्मा को पहला व खुशी सरोज को दूसरा स्थान मिला। प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश पाठक ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला।