राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत विश्वविद्यालय को शासन से मिले 20 करोड में से विश्वविद्यालय प्रशासन ने 37 लाख रूपये शासन को लौटा दिया है। शेष 19.63 करोड़
विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य के साथ ही लाइब्रेरी और अन्य मद में खर्च किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की माने तो दूसरे फेज में विकास कार्यो के लिए कुल 20 करोड मिला था। जिसमें से 19.63 करोड विश्वविद्यालय के विकास कार्यो में खर्च किया गया है। बची हुई 37 लाख धनराशि को विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन को जनवरी माह में लौटा लिया है। विश्वविद्यालय को जारी पत्र में शासन ने दूसरी फेज में विकास के लिए मिले धन का व्योरा मांगा था। साथ ही बचे हुए धन को वापस लौटाने का निर्देश दिया था। वित्त अधिकारी संजय राय ने बताया कि दूसरे फेज में विकास कार्यो के लिए कुल 20 करोड शासन से मिला था। जिसमें से 19.63 करोड विभिन्न मदों में खर्च कर दिया गया है। 37 लाख रूपये बचा था। इस धनराशि को शासन को लौटा लिया गया। दूसरे फेज में यदि किसी कार्य का भुगतान नहीं हो पाया है तो उसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजना पड़ता है। तीसरा शुरू होने वाला है। इस फेज में विकास कार्यो के लिए शासन फिर से धन अवमुक्त करेगा। सभी विश्वविद्यालयों की अपनी आवश्वयता होती है। उसी हिसाब से शासन धन अवमुक्त करता है। इस प्रकार शासन से मिले धन का विश्वविद्यालय प्रशासन समय से उपयोग नहीं कर पाया। जिसके चलते बची हुई धनराशि को शासन को लौटाना पडा।