पिछले कुछ वर्षों में सघन पौधरोपण अभियान के चलते जिले के वन क्षेत्र में काफी इजाफा हुआ है। कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 2.17 प्रतिशत से बढ़कर वन क्षेत्र अब 2.52 प्रतिशत हो चुका है। वन क्षेत्र में हुई इस वृद्धि के बावजूद लोगों को शुद्ध हवा मयस्सर नहीं है। शहरी क्षेत्र में हालात काफी विकट हैं। आलम यह है कि देश के सर्वाधिक प्रदूषित रहने वाले शहरों में जौनपुर की स्थिति लगातार टॉप-10 में रही है।
पिछले दो वर्षों में सघन पौधरोपण अभियान के तहत 76 लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं। वर्ष 2019 में 41 लाख 50 हजार और वर्ष 2020 में 36 लाख पौधरोपण हुआ था। इसके पहले भी करीब एक करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए थे। इस पौधरोपण अभियान का असर है कि वर्ष 2018 से पहले जिले का वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.17 से बढ़कर 2.52 प्रतिशत तक हो चुका है। हालांकि वन विभाग का मानना है कि वन क्षेत्र में वृद्धि इससे भी कहीं ज्यादा है। लगातार वन क्षेत्र बढ़ने के बाद भी पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। सबसे खराब स्थिति शहरी क्षेत्र की है। प्रदूषण के लिहाज से जौनपुर देश के सबसे संवेदनशील शहरों में शामिल हैं। जनवरी-फरवरी में यहां की हवा टॉप-10 प्रदूषित शहरों में शामिल रही। जिम्मेदार इसके लिए बढ़ते शहरीकरण, वाहनों के धुंए और निर्माण कार्यों की धूल को कारण मान रहे हैं। शहरी सीमा का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। खेतों को पाटकर नई कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। जनसंख्या घनत्व भी तेजी से बढ़ा है। वाजिदपुर से पॉलीटेक्निक चौराहे तक गिनती के पेड़ नजर आएंगे, जबकि इस इलाके में वाहनों की भीड़ और निर्माण कार्यों की धूल सबसे ज्यादा है। पेड़ अब गमलों के पौधों तक सिमट गए हैं।
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पौधे लगाते हैं, सुरक्षा नहीं करते
विश्व पर्यावरण दिवस सहित अन्य मौकों पर लोग पौधे तो खूब लगाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का प्रबंध नहीं करते। इसके चलते ही रोपण के कुछ समय बाद ही पौधे सूख जाते हैं या पशुओं का आहार बन जाते हैं। वन विभाग के अफसर भी मानते हैं कि 15-20 प्रतिशत तक पौधे नष्ट होते हैं, लेकिन वह अपने स्तर से इसकी जगह नए पौधे लगा देते हैं। अन्य विभागों व आम लोगों के स्तर से लगने वाले पौधों के साथ यह व्यवस्था नहीं है।
पौधरोपण अभियान के तहत इस बार 50 लाख सात हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हर विभाग इसकी जिम्मेदारी दी गई। वन विभाग को 16 लाख आठ हजार, ग्राम्य विकास विभाग को 18 लाख 42 हजार 960, राजस्व विभाग को 2 लाख 8 हजार 560, पर्यावरण को दो लाख 928, जल शक्ति को 7200, पंचायती राज को दो लाख आठ हजार 560, आवास विकास 5400, औद्योगिक विकास को 2400, नगर विकास 20 हजार 280, पीडब्लूडी को 7200, रेशम को 21 हजार 729, कृषि को तीन लाख 53 हजार 400, पशुपालन को 5400, सहकारिता को 8400, उद्योग को 6600, विद्युत विभाग को 3240, शिक्षा विभाग को 31 हजार 560, श्रम को 2160, स्वास्थ्य को 6480, परिवहन को 2160, रेलवे को 13 हजार 80, रक्षा को 4680, उद्यान को दो लाख 31 हजार 240, पुलिस को 5400 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
डीएफओ जीसी त्रिपाठी का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिले का वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 2.17 प्रतिशत से बढ़कर 2.52 प्रतिशत तक हो गया है। वैसे यह वृद्धि और ज्यादा है। पौधों के पेड़ बनने की प्रक्रिया में समय लगने के कारण नए पौधों का इसमें आकलन नहीं हो पाया है। जाहिर है पौधे तो खूब लगाए जा रहे, लेकिन इसकी सुरक्षा के प्रति लोग सचेत नहीं हो रहे। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधों की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है।