जिला पंचायत चुनाव अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को होने वाले चुनाव को लेकर जिले में राजनीति सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीति में प्रभावशाली दो धुरंधरों की नजर तीसरे खेमे पर लगी हुई है। इसके चलते इस बार का चुनाव काफी रोचक होता जा रहा है। भाजपा, सपा के अलावा कुछ अन्य संभावित प्रत्याशी भी अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर इस चुनाव को देख रहे हैं। वह इसके लिए हर कोशिश में लगे हैं।
समाजवादी पार्टी के लिए जीत की हैट्रिक बनाने का इस बार मौका है। वहीं, सपा के इस विजय रथ को रोकने के लिए भाजपा भी बेताब है, क्योंकि 20 साल बाद इस जिले में पार्टी की रिपोर्ट में उसकी अच्छी स्थिति बताई जा रही है। अपवाद को छोड़कर बात करें तो कई सालों में पहली बार पार्टी के दिग्गज नेताओं के विचार एक जैसे देखने को मिल रहे हैं और वह एकजुट होकर एक मंच पर आ गए हैं। हालांकि कुछ ऐसा ही समाजवादी पार्टी में भी देखने को मिल रहा है, जो पहले की तरह अपने प्रत्याशी को विजय श्री दिलाने के लिए अलग रणनीति के तहत जमीनी स्तर पर लगे हैं। माना जा रहा है कि इस सीट को लेकर सहयोगी पार्टी अपना दल से हो चुकी बातचीत के बाद भाजपा किसी क्षत्रिय वर्ग की महिला को अपना चेहरा बनाने जा रही है, जिसे संगठन के स्तर से संकेत भी देकर चुनाव मैदान में भेज दिया गया है, जिसके घोषणा की औपचारिकता बस बाकी है। पार्टी इन्हीं महिला के सहारे 1995 के बाद से चली आ रही कुर्सी पर कब्जा करना चाह रही है। दूसरी ओर, सपा-भाजपा के अलावा कुछ ऐसे भी दिग्गज मैदान में उतरें हैं, जो इस बार इतिहास बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसके लिए वह राजनीति के हर हथकंडे का सहारा ले रहे हैं।