वादे के अनुरूप अपनी छोटी बहन की शादी करने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद परेशान रामधनी ने अपने पुत्र के खिलाफ अपने अधिवक्ता के माध्यम से 9 सितंबर 2024 को जॉइंट मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दान पत्र को खारिज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। चूंकि मामला माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण के अंतर्गत आता है इसलिए जॉइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ ने सुलह समझौता अधिकारी ललित मोहन तिवारी को मौके पर जांच के लिए भेजा।
इस दौरान सैकड़ों ग्राम वासियों ने रमाकांत की घोर आलोचना करते हुए रामधनी के लगाए गए आरोप को सही बताया और बयान भी दिया। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उपरोक्त अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए दान पत्र को निरस्त किया गया है। साथ ही दान पत्र के आधार पर कब्जा की गई जमीन को पिता को वापस किए जाने का भी आदेश दिया है। जॉइंट मजिस्ट्रेट के इस निर्णय की अधिवक्ता समाज जमकर सराहना कर रहा है।
23धारा 23 मुख्य रूप से संपत्ति के हस्तांतरण को अमान्य करने के लिए एक तंत्र प्रदान करती है। इस धारा के तहत यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को दान देता है या हस्तांतरित करता है, तो यह इस शर्त के अधीन है कि प्राप्तकर्ता को बुनियादी देखभाल और भरणपोषण की सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि प्राप्तकर्ता ऐसा करने में विफल रहता है, तो यह हस्तांतरण रद्द कर दिया जा सकता है।