क्सा क्षेत्र के जमालपुर गांव में शौचालय पर दरवाजे की जगह लटकाया गया कपड़ा।
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करंजाकला। स्वच्छ भारत मिशन को छह साल पूरे होने वाले हैं, मगर गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का सपना अब तक साकार नहीं हो पाया है। अभियान के तहत गांव-गांव शौचालय तो बनवा दिए गए, लेकिन इन शौचालयों का उपयोग सुनिश्चित कराने की सुध किसी को नहीं है। आलम यह है कि शौचालयों में कहीं कबाड़ रखा जा रहा है तो कहीं उपले और लकड़ी हैं। तमाम शौचालय अब भी अधूरे पड़े हैं। लोग दरवाजे की जगह कपड़े का पर्दा डालकर काम चला रहे हैं।
करंजाकला ब्लॉक के जनसोपुर गांव में 110 शौचालय बनाए गए हैं। गांव ओडीएफ हो चुका है, मगर यहां बने शौचालय की हालत खस्ता है। गांव निवासी सोमारी पत्नी शिवनंदन के शौचालय में लकड़ी और उपला भरा हुआ है। वहीं दीपचंद, इंद्रजीत पुत्र पलटू के शौचालय का दरवाजा टूटा है। कपड़े का पर्दा लगाकर काम चला रहे हैं। यही स्थिति हैदरपुर गांव की भी है, जहां 70 शौचालय बने हैं। गांव निवासी हरिश्चंद्र के शौचालय में दरवाजा तो है लेकिन उसमें ताला बंद है। अगल-बगल घास-फूस देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि काफी समय से उसका इस्तेमाल नहीं हुआ है। गांव के कई अन्य शौचालयों का भी यही हाल है। कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें पात्रता सूची के बाद भी शौचालय नहीं मिला है। लिहाजा वह खुले में शौच जाने के लिए विवश हैं। बावजूद गांव को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया है।
खंड विकास अधिकारी वीरभानु सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से शौचालय बनवा दिया गया है। लाभार्थी की जिम्मेदारी है कि उसे साफ-सुथरा और दुरुस्त रखें। शौचालय होने के बाद भी जो लोग उपयोग नहीं कर रहे, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।