बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक एवं प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने में दो साल का वक्त लग सकता है।
ऐसा इसलिए कि मामले की सुनवाई के लिए जो दस्तावेज कोर्ट में जमा हैं उसमें अधिकतर हिंदी या उर्दू में हैं। इसका तर्जुमा (अनुवाद) अंग्रेजी भाषा में हुए बिना सुनवाई संभव ही नहीं है।
कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बगैर वहां सरकार एक ईंट भी नहीं रख सकती। उन्होंने पत्रकारों से ये बातें एक वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के नाम पर भाजपा के नेता जो बयान देते हैं वह सिर्फ सियासी फायदे के लिए होता है। वैसे इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा खुद नहीं चाहती कि
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो। जिस दिन वहां मंदिर बन जाएगा उस दिन पार्टी के पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं रह जाएगा। जिलानी ने कहा कि उनकी दिली ख्वाहिश है कि बाबरी मस्जिद का विवाद उनकी जिंदगी में ही
निबट जाए। जेएनयू की घटना पर उन्होंने कहा कि जिसने भी देश विरोधी नारे लगाए उसे माफ नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन मैने एक नहीं उस प्रकरण से जुड़ा वीडियो दस बार देखा। कहीं भी कन्हैया कुमार नारा लगाते नहीं
दिखा। सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो देश विरोधी नारे लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि नारा लगाने वालों में शेख उमर खालिद का नाम आया है उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके साथ राज्य मंत्री
आबिद रजा खां, पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद, मेंहदी रजा, शकील मंसूरी, सभासद इरशाद मंसूरी मौजूद थे।