पूर्वांचल विश्वविद्यालय में मूल्यांकन केंद्र में फर्जी शिक्षकों द्वारा जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं का मामला शांत नहीं हुआ है। जांच समिति ने 5 घंटे तक शिक्षकों के अभिलेखों को खंगाला। जरूरी कागजात भी मांगे हैं। दूसरे दिन जांच समित जांच के लिए जाएगी। फर्जी परीक्षकों द्वारा जांची गई कापियों का आंकड़ा भी जुटाया जा रहा है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में स्नातक व परास्नातक की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में शिक्षकों के फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद आजमगढ़ निवासी एक फर्जी शिक्षक सुभाष चंद को जेल भेज दिया गया था। नौ फर्जी शिक्षक मौके से फरार हो गए थे। इन शिक्षकों ने कई विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। इसमें सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हिंदी के कापियों को जांचने का मामला सामने आया है। कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच के लिए उन्होंने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। जिसमें प्रोफेसर रवि प्रकाश, डा. ऋषिकेश ,डा. गिरिधर मिश्रा व सहायक कुलसचिव अमृतलाल शामिल हैं। चार सदस्यीय जांच समिति मूल्यांकन केंद्र पर सुबह पहुंच गई। फर्जीवाड़े व शिक्षकों से जुड़े अभिलेख और कॉपियों के मूल्यांकन के बारे में पांच घंटे उलझी रही। हालांकि अभी तक टीम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अगले दिन कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्र डाक्यूमेंट्स मांगे हैं। सहायक कुलसचिव अमृतलाल ने कहा कि 5 घंटे लगातार जांच चली, जांच में क्या हैं वह खुलासा नहीं किया जाता। इसकी रिपोर्ट गोपनीय रहेगी।