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इमारतें शानदार, पर्यटक फिर भी बेजार

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05- अटाला मस्जिद की फोटो। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। शाही किला समेत शहर में मौजूद दर्जन भर से अधिक ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के बावजूद शहर पर्यटन के नक्शे पर नहीं आ पा रहा है। जबकि कई जन प्रतिनिधियों ने इस शहर को पर्यटन के नक्शे पर लाने का भरोसा जरूर दिलाया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अगर तरीके से पर्यटन का विकास हो तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा वार पर्यटन स्थलों की जानकारी मांगे जाने के बाद एक बार फिर से यहां लोगों में उम्मीद जगी है।
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फिरोज तुगलक द्वारा बसाया गया यह प्राचीन शहर काशी, अयोध्या और प्रयाग के मध्य में स्थित है। इससे यहां पर्यटन के विकास की संभावना अधिक है। वैसे अभी वर्ष भर में औसतन 150 से 200 पर्यटक यहां आते हैं। इस साल जनवरी महीने से लेकर 31 अगस्त तक आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से 93 पर्यटक जौनपुर आकर यहां की ऐतिहासिक इमारतों का दीदार कर चुके हैं। शहर की ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के आसपास की सड़कों का चौड़ीकरण किए जाने और पर्यटकों को ठहरने के लिए सरकारी सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। अगर सरकारी स्तर पर इसके लिए पहल हो जाए तो जौनपुर को एक बेहतर पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है। पुरातत्व विभाग के सहायक संरक्षक अविनाश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि अभी वर्ष भर में तकरीबन 200 पर्यटक यहां आते हैं।
लाल दरवाजा
नगर के बेगमगंज मुहल्ले में स्थित लाल दरवाजा का निर्माण सन 1450 ई. में इब्राहिम शाह शर्की के पुत्र महमूद शाह शर्की की पत्नी बीबी राजे ने करवाया था। इस इमारत का मुख्य दरवाजा लाल पत्थरों से निर्मित है। जिसे चुनार से मंगवाया गया था। इसमें मध्य हर तरफ महिलाओं के बैठने का स्थान है । जहां सुन्दर बारीक झझरियां कटी हुई हैं। मस्जिद के केन्द्रीय मेहराब को ढांकने वाली चादर काफी सुंदर है।
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झझरी मस्जिद
यह मस्जिद मुहल्ला सिपाह में गोमती के उत्तरी तट पर है। इसको इब्राहिम शाह शर्की ने मस्जिद अटाला एवं मस्जिद खालिस के निर्माण के समय बनवाया था। क्योंकि यह मुहल्ला स्वयं इब्राहिम शाह शर्की का बसाया हुआ था। यहां पर सेना, हाथी, घोड़े, ऊंट एवं खच्चर रहते थे। यह मस्जिद पुरानी वास्तुकला का अत्यन्त सुंदर नमूना है।
अटाला मस्जिद
1408 ई. में इब्राहिम शाह शर्की ने इस मस्जिद का निर्माण पूरा कराया था। इसकी ऊंचाई 100 फीट से अधिक है। इसका निर्माण 1393 ई. में फिरोज शाह ने शुरू कराया था।
शाही किला
नगर में गोमती तट पर स्थित इस दुर्ग का निर्माण फिरोज शाह ने 1362 में कराया था। इस दुर्ग के भीतरी फाटक 26.5 फीट ऊंचा तथा 16 फीट चौड़ा है। केन्द्रीय फाटक 36 फीट ऊंचा है। इसके ऊपर एक विशाल गुंबद है। अंदर तुर्की शैली का हमाम एवं एक मस्जिद भी है। इस दुर्ग से गोमती नदी एवं नगर का मनोहर दृश्य दिखायी देता है। इब्राहिम बरबक द्वारा बनवाई गई मस्जिद की बनावट में हिंदू एवं बौद्ध शिल्प कला की छाप है।
शाही पुल
जौनपुर के इस शाही पुल का निर्माण अकबर के शासनकाल में उनके आदेशानुसार 1564 ई. में मुनइन खानखाना ने करवाया था। यह भारत में अपने ढंग का अनूठा पुल है और इसकी मुख्य सड़क पृथ्वी तल पर निर्मित है। पुल की चौड़ाई 26 फीट है। जिसके दोनों तरफ 2 फीट 3 इंच चौड़ी मुंडेर है। दो ताखों के संधि स्थल पर गुमटियां निर्मित हैं।
जामा मस्जिद
शाहगंज रोड पर पुरानी बाजार के निकट 200 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई लिए हुए इस मस्जिद की बुनियाद इब्राहिम शाह के जमाने में पड़ चुकी थी। विभिन्न चरणों में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह मस्जिद काफी विस्तृत आकर्षक व कलात्मक है। ऊपर तक पहुंचने के लिए 27 सीढ़ियां हैं। इसका दक्षिणी द्वार पृथ्वी तल से 20 फीट ऊंचा है। इसके भीतरी प्रांगण का विस्तार 219 गुणे 217 फीट है। इसके प्रत्येक दिशा में फाटक है। पूर्वी फाटक को सिकन्दर लोदी ने ध्वस्त कर दिया था। मस्जिद का संपूर्ण घेरा 320 फीट पूर्व पश्चिम व 307 फीट उत्तर दक्षिण है। इस मस्जिद की सजावट, मिश्री शैली के बेलबूटे, मेहराबों की गोलाइयों, कमल, सूर्यमुखी व गुलाब के फूलों के चित्र जाली आदि दर्शनीय हैं।

07- शाही पुल की फोटो।- फोटो : JAUNPUR

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