जलालपुर के तालमझवारा गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा का में रुक्मणी विवाह का मंचन करते कलाकार
जलालपुर। ताला मझवारा पड़ान गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को काशी से आए कथावाचक पं. निलेश महाराज वेंकटेश ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि कंस के अत्याचार से पृथ्वी वासी परेशान थे। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों होना तय है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को कई बार मरवाने का प्रयास किया लेकिन हर प्रयास असफल रहा। कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने 11 वर्ष की अल्पायु में कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने माता-पिता वसुदेव और देवकी और महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया। कथाव्यास रमेश पाराशर ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है सिर्फ संकल्प की कमी होती है।