भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने बुधवार को भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। सात सूत्री मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक जिला प्रशासन को दिया।
संगठन के जिलाध्यक्ष अमर नाथ यादव ने कहा कि कहा कि किसानों के लंबे संघर्ष के बाद अंग्रेजों के कालेज भूमि अधिग्रहण कानून से कांग्रेस सरकार ने मुक्ति दिलाई थी। इसमें भाजपा ने भी समर्थन किया था, लेकिन अध्यादेश के
माध्यम से इस कानून में संसोधन किसानों के हित में नही है। इसे वापस लिया जाए। इसके अलावा किसानों की स्थानीय समस्याओं को लेकर किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की।
किसानों ने मांग किया कि भाजपा ने चुनाव में वादा किया था कि कृषि उत्पादों के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य देने की घोषणा की गई थी, लेकिन खरीद पिछले सीजन से ही खराब स्थिति में चल रही है।
मांग किया कि धान, गेहूं के लिए 3000, आलू 1500 और गन्ना 500 रुपये का रेट निर्धारित किया जाए। एक एकड़ से कम के किसानों को भी मजदूरों की श्र्रेणी में लेकर उन्हें सभी सरकारी सुविधा दी जाए। जनधन योजना के तहत
खोले गए खाता के खाताधारक जो 60 वर्ष पूरा कर लिए हैं उन्हें 5000 मासिक पेंशन दिया जाए। किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले घड़रोज, नीलगाय, जंगली सूअर को वन्य अभयारण्य में संरक्षित किया जाए।
इसके अलावा मांग की कि लोकहित के लिए गठित आयोगों की भांति राष्ट्रीय किसान आयोग का भी गठन किया जाए। किसानों ने प्रदेश सरकार को संबोधित पत्रक में कहा कि दो एकड़ तक की भूमि वाले किसानों द्वारा लिए गए कर्ज को
माफ किया जाए। 18 घंटे बिजली उपलब्ध की जाए। लोहिया गांव सवैया अगहुआ मछलीशहर के कोटेदार के खिलाफ खाद्यान गबन के मामले में जांच की जाए। संजय शुक्ला, अवधेश यादव, समरनाथ, कृष्ण लाल मौर्या, शोभनाथ यादव,
बाबूराम, राजमनि, राम सूरत, डा. सत्य नारायण, राजेंद्र सिंह, मोहम्मद मोबिन, फूलकुमारी, सितारा बानो, शाहजहां बानो, रूकसाना बानो, निर्मला देवी, गीता और लालजी आदि मौजूद थे।