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सौ करोड़ से सिर्फ दो भवनों का टेंडर, बाकी की स्थिति स्पष्ट नहीं

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जौनपुर। अधूरे मेडिकल कॉलेज के निर्माण को फिर से चालू करने की कवायद तेज हो गई है। कार्यदायी संस्था ने टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी है। अभी सिर्फ दो प्रमुख भवनों को बनाने के लिए ही टेंडर किया जा रहा है। अन्य भवनों को बनाने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। कोशिश है कि दिसंबर तक जैसे-तैसे यह काम पूरा कर ओपीडी का संचालन शुरू करा दिया जाए।
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सिद्दीकपुर में मेडिकल कॉलेज की नींव सपा सरकार ने वर्ष 2015 में रखी थी। तब इसकी लागत 554 करोड़ रुपये रखी गई है। इसे वर्ष 2018 तक शुरू कर दिया जाना था। तमाम तरह के विवाद के कारण निर्माण कार्य जोर नहीं पकड़ सका। नतीजा अब तक सिर्फ 45 फीसदी ही काम हो पाया है। इसमें भी लागत बढ़कर अब 597 करोड़ हो गई है। अब तक ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। धीमी गति के कारण ही पिछले दिनों कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम ने टाटा प्रोजेक्ट्स का टेंडर निरस्त करते हुए 30 करोड़ का जुर्माना लगाया था। संस्था को काली सूची में डालने के भी निर्देश दिए थे। इसके साथ ही नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। तय प्रारुप के अनुरूप काम पूरा कराने के लिए करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की दरकार है, मगर अभी सिर्फ दो भवनों के लिए ही टेंडर कराया जा रहा है। इसमें मुख्य अस्पताल भवन के लिए 48.85 करोड़ और शैक्षणिक व आवासीय भवन के लिए 49.76 करोड़ की लागत रखी गई है। मेडिकल कॉलेज के अन्य हिस्सों पर काम के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्य की अवधि भी छह महीने रखी है। राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक एमपी सिंह का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। कार्य अवधि छह माह रखी गई है। संबंधित फर्म को इस अवधि में काम पूरा करना होगा। वैसे मुख्य भवन का काफी हिस्सा पूरा हो चुका है। शीघ्र ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में बनने हैं यह भवन
एकेडमिक ब्लॉक, एडमिन ब्लॉक, शैक्षणिक हास्पिटल, ऑडिटोरियम, खेल मैदान, गेस्ट हाउस, शॉपिंग क्षेत्र, ब्वायज और गर्ल्स हॉस्टल, सीनियर व जूनियर डॉक्टर के आवास, इंटर्न्स हॉस्टल, टाइप-5, टाइप-4, टाइप-3, टाइप-2 और टाइप-1 के आवास, स्कूल भवन, एसटीपी, ईएसएस, तालाब, पशु आवास आदि। इसमें सिर्फ प्राचार्य और सीनियर डॉक्टर्स के आवास का कुछ हिस्सा ही पूरा हुआ है। अब दो अन्य भवनों के लिए टेंडर कराया जा रहा है। अन्य भवनों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
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