सीएचसी में महिलाओं का उपचार करती चिकित्सक डॉ. ऋचा दुबे। संवाद
बदलापुर। सरकार की ओर से कई तरह के कार्यक्रम चलाकर लगातार गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी हमेशा आशा व अन्य कर्मियों को घर-घर भेजकर टीकाकरण व चिकित्सकीय सलाह के लिए प्रेरित करता रहता है। इसके बावजूद सीएचसी की ओपीडी में रोज 10 से ज्यादा एनीमिया पीड़ित महिलाएं आती हैं। सीएचसी की ओपीडी में रोज 250 से तीन सौ मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें 100 से अधिक महिलाएं आती हैं। गर्भवती महिलाओं में सबसे ज्यादा खून की कमी की समस्या होती है। हालांकि इनमें से गंभीर अवस्था में न के बराबर ही होती हैं। शेष ऐसी महिलाएं होती हैं, जिन्हें खानपान औ दवा से ठीक कर दिया जाता है। चिकित्सकों ने बताया कि गर्भावस्था में महिला को खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। वजह शिशु भी विकास के लिए मां से ही पोषण लेता है। अगर खून की कमी बनी रही तो समय से पूर्व प्रसव व शिशु पैदा होने पर कमजोर व रोगों से पीड़ित हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को खानपान पर विशेष ध्यान देते हुए चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए। चिकित्साधीक्षक डॉ. संजय दुबे ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की ओपीडी में जो भी एनीमिक महिलाएं आती हैं, उन्हें दवा व खानपान से ठीक कर दिया जाता है। महीने में एकाध महिलाएं गंभीर अवस्था में आती हैं, जिन्हें खून चढ़ाकर ठीक किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पालक, गाजर, चुकंदर, हरी सब्जी व फल का प्रचुर मात्रा में उपयोग करना चाहिए। कमजोरी, थकान, चक्कर की समस्या होने पर सीधे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।