जौनपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर शिक्षकों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को 11 सूत्रीय मांग पत्र भेजा। इस मांग पत्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की प्रमुख मांग शामिल है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने अपनी चिंता जताई। जिला संयोजक सत्येंद्र सिंह ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को न्यूनतम अर्हता बनाया था। इससे पहले देशभर में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थीं।
इन शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। न्यायालय के 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के निर्णयों के बाद लाखों शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता छा गई है। संगठन का तर्क है कि किसी भी नए पात्रता मानदंड को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
महासंघ ने केंद्र सरकार और संसद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने प्रभावित शिक्षकों को संरक्षण प्रदान करने के लिए सकारात्मक पहल की मांग की। महासंघ ने अपनी मांगों में स्पष्ट किया है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए। उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी यह छूट मिलनी चाहिए। संगठन ने इन शिक्षकों को स्थायी राहत देने की वकालत की है।
इसके लिए संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाने की आवश्यकता बताई गई है। धरना प्रदर्शन में जिला सह संयोजक केशव सिंह, अभिषेक सिंह, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, रत्नेश सिंह, अरविंद प्रकाश, अखिलेश मिश्रा राकेश सिंह, प्रीति श्रीवास्तव, प्रीति मौर्या, बबीता सिंह और नीतू सिंह आदि उपस्थित रहे।