पुलिस के लिए नियम-कानून कोई मायने नहीं है। एसपी से लेकर डीजीपी तक कहते हैं कि एफआईआर दर्ज न करने वाले एसओ के खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन जिले की पुलिस के लिए पीड़ित द्वारा लिखित पहली तहरीर बेकार साबित हो रही है।
कमोवेश हर थानों में तहरीर बदलवाकर ही एफआईआर दर्ज किया जा रहा है। जिले में किसी भी पुलिस कर्मी के खिलाफ केस दर्ज न करने की लापरवाही में कोई कार्रवाई हाल के दिनों में नहीं हुई। यही कारण है कि थाने के मुंशी, दीवान और दरोगा एफआईआर दर्ज करने के लिए मोलभाव करते हैं।
सरपतहा थाना क्षेत्र के रुधौली बाजार निवासी कल्लू जायसवाल को बदमाशों ने मारपीटकर पांच हजार रुपये एक सप्ताह पहले छीन लिया था। जब वह थाने पर गए तो उन्हें उलटे ही पुलिस ने लाकप में डाल दिया। बाद में तहरीर गुमशुदगी का लिखवाकर छोड़ दिया।
आए दिन इस तरह की खेल जिले के लगभग सभी थानों में हो रही है। लेकिन पुलिस अफसर शिकायत के बाद भी चुप्पी साध बैठे हैं। ऐसा नहीं है कि पहले ऐसा नहीं होता था, लेकिन इधर इस तरह की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। जिस पर कोई अंकुश पुलिस अफसर नहीं लगा पा रहे हैं।
और तो और अमूमन पुलिस एफआईआर ही नहीं दर्ज करती। मछलीशहर थाना के विसपालपुर गांव स्थित मुनेश्वर महाविद्यालय के पास आकांक्षा आनलाइन कंप्यूटर सेंटर से 28 मई की रात पीछे का दरवाजा काटकर कंप्यूटर, प्रिंटर समेत लाखों का सामान चोर उठा ले गए।
इस मामले में डाग स्क्वायड भी पहुंचा, लेकिन घटना का खुलासा तो दूर आज तक एफआईआर भी दर्ज नहीं की। पुलिस का कहना है कि सामान बरामद होने पर केस दर्ज कर लिया जाएगा।