करंजाकला में सड़क किनारे टूटा ट्रीगार्ड और पौधा सूखा।
धरा पर हरियाली लाने के लिए यूं तो वन विभाग हर साल दो से तीन लाख पौधे रोपने का दावा करता है। पर अगर इसमें से आधे पौधे भी विभाग जिंदा रखने में कामयाब होता तो भी जिले में चारो तरफ हरियाली ही हरियाली दिखती। लेकिन पौधे रोप कर वन विभाग उसकी रखवाली नहीं कर पाता नतीजतन 60 प्रतिशत पौधे सूख जाते हैं।
विभाग के पास पौधों की सिंचाई और उसकी देखभाल के लिए संसाधन और कर्मचारियों की कमी है।वन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 में 50 लाख रुपए खर्च कर जिले में 250 हेक्टेयर भूमि पर सवा दो लाख पौधे रोपे गए थे।
वर्ष 2015 में 73 लाख रुपए खर्च कर 432 हेक्टेयर भूमि में तीन लाख पौधे रोपे गए थे। लेकिन सुरक्षा व सिंचाई के अभाव में वर्ष 2014 में लगे 60 प्रतिशत पौधे सूख गए। लगभग यही हस्र वर्ष 2015 में रोपे गए पौधों का भी हुआ।
चालू वर्ष में में ग्रीन यूपी क्लीन यूपी के अंतर्गत 75 लाख रुपए खर्च कर पांच लाख 31हजार पौधे रोपने का लक्ष्य है। पर पौधों को रोपने से कहीं अधिक उनकी सुरक्षा की दरकार है। पौधों की सिंचाई और सुरक्षा के लिए वन विभाग के पास एक टैंकर है और आठ हेक्टेयर पर एक पशु रक्षक हैं। विभाग का मानना है कि संसाधन बढ़ाया जाए तो पौधों की सुरक्षा मुकम्मल हो सकती है।