फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वीपर कर रहा उपचार, वार्ड ब्वाय पका रहा था मीट

विज्ञापन
विज्ञापन
स्वीपर कर रहा उपचार, वार्ड ब्वाय पका रहा था मीट
विज्ञापन

- अस्पताल पर मरीजों का इलाज करते हुए मिला स्वीपर
- अतिरिक्त पीएचसी पर वार्ड ब्वाय पका रहा था मीट
संवाद न्यूज एजेंसी
केराकत। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए बनाए गए सरकारी अस्पताल में पूरी व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। कुछ ऐसी ही हालत विकास खंड अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमिहित की है। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा का हाल जानने के लिए अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो समीपवर्ती आजमगढ़ जपनद के ग्राम चेवार निवासी संतलाल भारती (70) को बेड पर लिटा कर स्वीपर सतीश कुमार इंजेक्शन लगा रहा था। पूछने पर मरीज ने बताया कि खुजुली हुई है। उसी की सुई लग रही है। अस्पताल में ही बगल के कक्ष में वार्ड ब्वाय रामश्रृंगार चूल्हे पर कुछ भोजन बना रहा था। पूछने उसने पर बताया कि चिकित्सा अधीक्षक के लिए मीट पका रहा हूं। अस्पताल पर डॉ. अशोक कुमार सोनकर की तैनाती है। वह तीन दिन डोभी अस्पताल पर और तीन दिन यहां मरीजों को देखते है। दवा के नाम पर स्वीपर टेबल पर रखी कुछ दवाओं पैरासिटामाल, रैनटेक, कैल्शियम, मेट्रोजिल, आयरन, आई ड्राप, ईयर ड्राप कुछ हल्की दवाओं को दिखाया। पूछने बताया कि यहां न तो ब्लड जांच की व्यवस्था है और न ही एक्स-रे मशीन है। जीवन रक्षक दवाएं तो कभी यहां रहती ही नहीं। पीएचसी पर ओपीडी के समय कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। केवल स्वीपर और एक स्टाफ मरीजों का इलाज कर रहे थे। फार्मासिस्ट अनिल कुमार साहू किसी काम से केराकत गए हुए हैं।
---
इनसेट
स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ा रहा अस्पताल
केराकत। पीएचसी परिसर में मरीजों के लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। यही नहीं पानी पीने के लिए एक हैंडपंप भी नहीं है। अस्पताल के सभी कमरों के फर्श टूट चुके हैं। खिड़कियां भी टूटी पड़ी है। आवासीय परिसर में आवास के चारों तरफ बड़ी-बड़ी घासें उगी हैं, लेकिन इन आवासों में कोई रहता नहीं है। चारों तरफ गंदगी का माहौल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
अस्पताल में शौचालय, पेयजल सहित अन्य दिक्कतों के लिए उच्चाधिकारियों को लगातार अवगत कराया जाता रहा है। मेरी ड्यूटी तीन दिन ही इस अस्पताल पर है। अन्य दिनों में डोभी से अटैच हूं। जरुरत पड़ने पर कर्मचारियों का सहयोग लिया जाता है। स्वीपर से उपचार की बात सही नहीं है। जानकारी लेकर ही कुछ बता पाऊंगा। -डॉ. अशोक सोनकर, चिकित्सक, पीएचसी अमिहित।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें