जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित राष्ट्रीय सेवा योजना भवन में स्वदेशी जागरण मंच की ओर से संचालित स्वावलंबी भारत अभियान की शुरुआत हुई। इसमें स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार एवं युवा सशक्तिकरण जैसे विषयों पर गहन विमर्श किया गया।
स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश ने कहा कि भारत को विश्व नेतृत्व की ओर ले जाने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ स्वदेशी और स्वावलंबन हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे देश की युवा शक्ति को अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा सकते, क्योंकि नौकरियों की सीमाएं हैं जबकि स्वरोजगार और उद्यमिता असीम संभावनाओं का क्षेत्र है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों, कुटीर उद्योगों, कृषि आधारित उद्यमों और भारतीय तकनीक को बढ़ावा देना समय की मांग है।कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवाओं का मन और शरीर दोनों स्वस्थ हों। योग, प्राणायाम और सकारात्मक चिंतन युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण के आधार हैं।
जब युवा आत्मविश्वास के साथ स्वावलंबन की दिशा में सोचते हैं तो उनके भीतर नेतृत्व क्षमता, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होता है। परीक्षा नियंत्रक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार के वैचारिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ सह-संगठक सतीश एवं कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने पौधरोपण कर किया। भारत माता के चित्र एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ. राजीव कुमार ने आभार व्यक्त किया। कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक अवधारणा नहीं बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का आंदोलन है।
इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार सिंह, अनुपम श्रीवास्तव, डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, प्रो. सुरेश पाठक, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. अविनाश, डॉ. मनोज कुमार पांडेय, डॉ. विवेक मिश्रा, डॉ. प्रशांत त्रिवेदी उद्देश्य आदि उपस्थित रहे।