बिजली निगम में सात साल से संविदा पर कार्यरत लाइनमैन धर्मेंद्र गौतम (35) की शनिवार को करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घघरिया गांव में 11 हजार वोल्ट की लाइन में फाल्ट ठीक करने के लिए वे खंभे पर चढ़े थे। इसी दौरान बिजली आपूर्ति चालू होने से वे करंट की चपेट में आ गए। घटना के बाद परिजनों ने भीम आर्मी के सदस्यों के साथ सीएचसी में शव रखकर करीब आठ घंटे तक धरना दिया। प्रभारी निरीक्षक विनीत राय ने बताया कि मृतक की पत्नी प्रियंका की तहरीर पर एसएसओ और लाइनमैन क्षमानाथ के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराने और बिजली निगम के एक्सईएन राजन कुमार के 10 लाख रुपये मुआवजा देने के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
घघरिया गांव निवासी मृतक के छोटे भाई महेंद्र ने बताया कि धर्मेंद्र शनिवार की सुबह करीब 11 बजे नाइट ड्यूटी पूरी करके घर लौटे थे। घर से करीब 100 मीटर दूर बिजली का जंफर उड़ने की जानकारी मिलने पर वे शटडाउन लेकर फाल्ट ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े। इसी दौरान एक अन्य लाइनमैन भी शटडाउन लेकर काम कर रहा था। आरोप है कि उसका काम पूरा होने के बाद उपकेंद्र में ड्यूटी पर तैनात एसएसओ ने बिजली आपूर्ति चालू कर दी। इससे खंभे पर काम कर रहा धर्मेंद्र करंट की चपेट में आ गया। उसका शरीर जलने लगा। ग्रामीणों ने आग बुझाते हुए धर्मेंद्र को ऑटो रिक्शा से सीएचसी मछलीशहर ले गए। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण सीएचसी पहुंच गए। बिजली निगम के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। परिजनों ने शव उठाने से इनकार कर दिया। कई बार ग्रामीणों ने चक्का जाम का भी प्रयास किया।