जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को ऑनलाइन डिग्री और सर्टिफिकेट की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हर साल करीब एक लाख डिग्रियां डिजीलॉकर में अपलोड कर औपचारिकता पूरी करती हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय से डिग्री लेने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय तक दौड़ लगानी पड़ रही है। पिछले करीब आठ साल पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया था कि अब छात्रों को डिग्री लेने और सत्यापन कराने के लिए भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। छात्रों की डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन विश्वविद्यालय के डिजीलॉकर में सुरक्षित रखी जाएगी। ताकि उनको जरूरत पड़ने पर सत्यापन कराने में किसी तरह की दिक्कत न आए। लेकिन तकनीकी व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को पटला, बिहार, गाजीपुर के साथ अन्य जनपद के छात्रों ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर पहुंच कर कुलपति से शिकायत दर्ज कराई थी। नवागत कुलपति प्रो. राकेश सिंह ने छात्रों को आश्वासन देकर शांत कराया कि तकनीकी खामी को ठीक कर ऑनलाइन सुविधाएं दुरुस्त करा दी जाएंगी। उसके बाद छात्रों को सुविधाएं मिलने लगेगी।
राज्यपाल ने डिजीलॉकर में रखी थी 80141 डिग्रियां
27 जुलाई 2026 को आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल में विश्वविद्यालय के डिजीलॉकर में 80,141 छात्र-छात्राओं की डिग्रियों को अपलोड किया था। छात्र-छात्राओं की उपाधियां डिजिटल रूप से सुरक्षित की गईं। विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में हर साल डिग्री और अन्य प्रमाण पत्रों को डिजीलॉकर में सुरक्षित रखा जाता है।
क्या है डिजिलॉक
भारत सरकार की ओर से शुरू किया गया एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, इसकी मदद से कोई भी अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों को डिजिटल रूप में स्टोर और सत्यापित कर सकते हैं। इसका उद्देश्य भौतिक (पेपर) दस्तावेजों की जरूरत को कम करना और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है। डिजीलॉकर पर डिग्री होने के कारण डिग्रियां खोने या फटने का कोई डर नहीं रहता। तत्काल नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए संस्थान सीधे ऑनलाइन वेरीफाई कर सकते हैं। छात्रों को हर जगह ओरिजिनल डॉक्यूमेंट की हार्ड कॉपी ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।