जौनपुर। शहर के पचहटिया में बन रहेे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जल्दबाजी में अनुमोदन और डिजाइन की खामियों पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य अभियंता ने इस मामले में अभियंताओं से स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि जल्दबाजी में अनुमोदन क्यों किया गया। काम खराब होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी। उन्होंने कमियों में समय रहते ही सुधारकर काम कराने का निर्देश दिया है।
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा की प्रमुख सहायक नदी गोमती को स्वच्छ रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। पचहटिया मोहल्ले में अक्तूबर 2019 से इसका निर्माण शुरू हुआ है। कार्यदायी संस्था जल निगम ने एसपीएमएल और पुलकित प्रोजेक्ट्स को निर्माण का जिम्मा सौंपा है। कार्य शुरू होने के बाद से ही एसटीपी की गुणवत्ता और डिजाइन पर सवाल उठने लगे थे। तब जलनिगम के अधिकारियों ने आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया गया था।
हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद अधिशासी अभियंता ने 14 मई को परियोजना प्रबंधक को एक पत्र लिखकर डिजाइन और गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं होने की बात कही थी। यह पत्र विभाग के अफसरों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। पत्र का संज्ञान लेते हुए मुख्य अभियंता एके पुरवार ने अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि एक्सईएन की ओर से लिखे गए पत्र में जल्दबाजी में अनुमोदन करने का क्या तात्पर्य है। क्या फर्म की ओर से प्रस्तुत डिजाइन एवं ड्राइंग का परीक्षण करने के लिए संबंधित अधिकारी को पर्याप्त समय नहीं दिया गया था? या परीक्षण में लापरवाही बरती गई। एसटीपी की गुणवत्ता में कमी का दोषी कौन होगा। पत्र में यह भी उल्लेख है कि बिना कमियों को दूर कराए, अब काम न कराया जाए।
पूर्व एक्सईएन ने गुणवत्ता पर यह उठाए थे सवाल
तत्कालीन एक्सईएन सुनील कुमार ने एसटीपी के लिए संपूर्ण वाटर रिटेनिंग स्ट्रक्चर की डिजाइन और ड्राइंग को टेंडर के अनुरूप नहीं पाया था। उनका कहना था कि अनुबंध के मुताबिक वाटर रिटेनिंग स्ट्रक्चर के पीसीसी की मोटाई 150 मिलीमीटर होनी चाहिए और उसे एम-20 ग्रेड की कंक्रीट बनाना चाहिए। मगर इसमें 100 मिलीमीटर औ ए-10 ग्रेड कंक्रीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्ट्रक्चर के बेस स्लैब की मोटाई 350 मिलीमीटर के स्थान पर मात्र 150 मिलीमीटर रखा गया है। दीवाल की मोटाई भी मानक के अनुरूप नहीं है। इसमें संशोधन कर ही निर्माण कराया जाना चाहिए।
काम रोककर दोषियों को बेनकाब करने की मांग
एसटीपी निर्माण में अनियमितता का आरोप लगा रहे स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए तत्काल काम रोकवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व सीवर लाइन बिछाने में गंभीर वित्तीय व तकनीकी गड़बड़ियां की गई हैं। हम इसका विरोध शुरू से कर रहे हैं अब अब जलनिगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया है। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। मुख्यमंत्री से भी शिकायत की गई है। सरकार तत्काल काम को रोककर, दोषियों को कड़ी सजा दे।
यह पत्र मेरे संज्ञान में नहीं है। पत्र आया होगा तो कार्यालय से इस बारे में हम पता कराएंगे। जो भी जवाब मांगा गया है, उसे दिया जाएगा। वैसे कार्यभार संभालने के बाद मैं खुद इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहा हूं। कार्य अनुबंध की शर्तों के अनुरुप और स्वीकृत डिजायन के आधार पर कराने का पूरा प्रयास कर रहा हूं। -संजय कुमार गुप्ता, एक्सईएन, जलनिगम