इसके बाद भी कभी खेत, तो कभी घर के आसपास सर्प उन्हें डसता रहा। आखिरी बार इस साल 30 मई को गांव की एक शादी में जाते समय रास्ते में कोबरा सर्प ने काट लिया। महेश शादी में गए और खाना खाते समय वहां चक्कर आ गया। फिर आनन फ़ानन उनको चिकित्सक के पास ले जाया गया। वहां फिर वह मौत को मात देकर घर लौट आए।
इस तरह कुल 14 बार महेश को सांप डस चुका है। महेश बताते हैं कि शुरू में बहुत डर लगता था। सांप देखते ही भागते थे। लेकिन अब तो सांप देखकर हंसी आती है। वे मानते हैं कि उनके भीतर एक अलग तरह का आत्मविश्वास है, जो उनके जिंदा रहने की वजह बन चुका है।
बोले अधिकारी
यह मामला दुर्लभ है। लेकिन असंभव भी नहीं है। बार-बार विष के संपर्क में आने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। यह भी संभव है कि अधिकांश बार उन्हें कम विषैले या विषहीन सांप ने डसा हो। सही समय पर इलाज भी बचाव का कारण है। - डॉ. अरुण कुमार कनौजिया, अधीक्षक, केराकत सीएचसी।