जौनपुर। निजी वाहन संचालक प्रशासन की व्यवस्था से पूरी तरह नाखुश हैं। वाहन स्वामियों का कहना है कि करोड़ों का राजस्व सरकार को देते हैं फिर भी डग्गामार का नाम देकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। हर तिराहे-चौराहे पर चालान काटने की धमकी देकर उनसे वसूली की जा रही है। चालक और परिचालक हमेशा सहमे रहते हैं। यदि जिला प्रशासन सरकार के आदेशों का अनुपालन करते हुए उन्हें उचित स्थान और सुविधाएं मुहैया नहीं कराता है तो वाहन संचालक अपने सभी प्रपत्र सरेंडर करने को बाध्य होंगे। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। संघ सदन तक इस मुद्दे को उठाएगा।
जन परिवहन संचालक संघ की बैठक रविवार को संघ के अध्यक्ष डा. दिनेश सिंह बब्बू के हुसैनाबाद स्थित आवास पर आहूत की गई। इसमें वाहन स्वामियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की निंदा की गई। डा. दिनेश सिंह बब्बू ने कहा कि मुख्यमंत्री का निर्देश है कि नगरपालिका परिक्षेत्र में बस स्टैंड के साथ पेयजल, शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय, विश्राम स्थल की समुचित व्यवस्था करवाकर वाहन स्वामियों को सौंपा जाना चाहिए। यदि उसके बाद कोई वाहन अन्य स्थान से संचालित हो तो उसके विरुद्ध कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाए। लेकिन बिना स्टैंड निर्धारित किए प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई उत्पीड़न की श्रेणी में है। वाहन संचालक संघ अपने प्रपत्र पूर्ण होने के पश्चात ही वाहनों का संचालन करते हैं। मार्ग कर, वाहन कर, परमिट आदि से करोड़ों का राजस्व सरकार को देते हैं। जन परिवहन संचालक संघ उपरोक्त मांगों के पूर्ण ना किए जाने पर, अपने सभी वाहनों और प्रपत्रों को सरेंडर करने के लिए बाध्य होगा। संघ अपने और अपने कर्मचारियों के सपरिवार भरण पोषण की व्यवस्था के लिए, प्रशासन से मांग करेगा, जिसके पूर्ण ना होने वह आंदोलन के लिए मजबूर होगा। बैठक में मुख्य रूप से महासचिव मित्रसेन सिंह, डॉ. राजवीर सिंह राजा, व्यापारी नेता श्रवण जायसवाल, रतन पाठक बब्बू, ललित मोहन सिंह, गोरख यादव, विनोद सिंह, सुरेश सिंह, अनूप यादव, रत्नेश सिंह मौजूद रहे।
संघ की यह हैं प्रमुख मांगें
जौनपुर। संघ की मांग है कि जन परिवहन संचालक संघ को जेसीज चौराहे के निकट एक सर्व सुविधायुक्त स्टैंड सुनिश्चित किया जाए। बसों की तरह ही अन्य टैक्सी और बैटरी संचालित तीन पहिया वाहनों का भी अलग स्टैंड सुनिश्चित किया जाए। सभी वाहनों का यथोचित किराए का भी निर्धारण किया जाए, डग्गामार वाहन शब्द का नाम हटाया जाए। हर नुक्कड़ चौराहों पर चालान का डर दिखाकर की जा वसूली बंद की जाए।