भीषण गर्मी में अलफस्टिनगंज मोहल्ले में पानी पीती गाय।
उनकी दिनचर्या राहगीरों और शहर में घूमने वाले मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम करने से शुरू होती है। सुबह उठकर घर के सामने सड़क किनारे रखी नाद और बरामदे में रखे दो बड़े घड़ों की सफाई कर उसमें साफ पानी भरने के बाद ही वह कोई दूसरा काम करते हैं।
इसपर वह पूरे दिन निगरानी भी रखते हैं। जैसे ही नाद या घड़े का पानी खत्म हुआ वैसे ही उसमें फिर से भर दिया जाता है। नगर के अल्फस्टीनगंज मोहल्ला निवासी एवं शहर के प्रमुख व्यवसायी किशन हरलालका द्वारा 1984 में शुरू किया गया यह सिलसिला आज भी वैसे ही चल रहा है।
उनके घर के सामने से गुजरने वाला कोई भी इंसान या मवेशी प्यासा नहीं जा सकता। राहगीरों को पानी पीने के लिए वहां बाकायदा बतासा भी रखा जाता है। राजस्थान के पिलानी जिले के मूल निवासी किशन हरलालका को समाज सेवा की यह भावना विरासत में मिली है।
वह कहते हैं कि उनके गांव (राजस्थान) में लोग कई कोस दूर से ऊंट पर लादकर पानी लाते हैं और सभी के घर के बाहर घड़े में पानी राहगीरों के लिए रखा जाता है। इससे बड़ा पुण्य मिलता है। उनके पिता घनश्याम दास हरलालका व्यवसाय के लिए यहां आए थे।
यहां कारोबार फैला तो परिवार के अन्य सदस्य भी यहीं आ गए। किशनलाल हरलालका कहते हैं कि बहुत पहले प्रधान डाकघर के पास मवेशियों को पानी पीने के लिए टंकी बनवाई गई थी। जिसे बाद में तोड़ दिया गया।
शहर में छुट्टा घूमने वाले मवेशियों के लिए पानी पीने का कोई इंतजाम नहीं था। इसे देखते हुए गांव से नाद मंगवाई और प्रतिदिन यहां नाद में पानी भरा जाता है। इधर से गुजरने वाले इक्का तांगा वाले भी यहां रुक कर घोड़ों को पानी पिलाते हैं।