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साहब, मेरे पिताजी को बचा लीजिए

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जौनपुर। साहब, मेरे पिताजी को बचा लीजिए... मेरे पापा फिर नहीं आएंगे साहब कुछ करिए। रात से भर्ती किया हूं। सुबह हो गया, मगर अब तक उपचार शुरू नहीं हुआ। रात में सिर्फ एक कंपाउंडर था। कुछ बोलते थे तो कहता था कि यहां कोई सुविधा नहीं थी। पानी भी नहीं दिया जा रहा। बाहर खरीद कर पानी दे रहा हूं। गर्म पानी की जगह ठंडा पानी पिलाएंगे तो मरीज कहां से बचेगा। सोमवार को एल-2 अस्पताल के बाहर खड़े होकर बिलख रहे खुटहन निवासी संजय पटेल के कुछ ऐसे ही अल्फाज थे।
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आंखों से बहते आंसुओं के बीच वह हाथ जोड़कर लोगों से गिड़गिड़ा रहा था कि कोई कुछ ही करे, बस मेरे पिताजी की जान बचा ले। संजय के मुताबिक अस्पताल में कोई भी सुविधा नहीं मिल रही। जो भी अंदर जा रहा है, वह ठीक होकर बाहर नहीं आ रहा। बस मर जा रहा है। अधिकारी भी निरीक्षण करने आए तो बाहर से ही बोले कि सब ठीक है, सब ठीक है। बाहर कोई अस्पताल भर्ती नहीं ले रहा और सरकारी का यह हाल है। कैसे जिंदगी बचेगी। मर जाएंगे नहीं तो क्या होगा। हम कहां जाएं साहब। संजय का यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल रहा। हालांकि अस्पताल के जिम्मेदार व्यवस्थाएं बेहतर होने के दावे करते रहे।
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