मीरगंज। थाना क्षेत्र के अगहुआ गांव में तीन बच्चों की मौत के बाद तीसरे दिन मंगलवार को भी मातमी सन्नाटा पसरा रहा। गांव के कई घरों में तीसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले। वहीं, तीनों बच्चों की मौत का कारण बनी उनकी मां अंतिमा के भविष्य को लेकर स्वजन चिंतित हैं। वह भी कमरे में अकेली गुमसुम बैठी हुई थी। शोक जताने आने वाली गांव की महिलाएं दूर से उसे देख रही थीं। सबकी आंखें डबडबा रही थीं।
एक पखवारे पहले ससुराल से मायके आई अंतिम की मानसिक हालत ठीक नहीं बताई जाती है। वह रविवार की शाम अपने नौ माह के जुड़वा बेटों अनुज और अतुल और बेटी त्रिशा (4) को घर से करीब 300 मीटर दूर कुएं में फेंकने के बाद खुद भी कूद गई थी। हालांकि गांव के लोगों ने उसे बता लिया था लेकिन तीनों बच्चों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मायके और ससुराल पक्ष से लिखित तौर पर लेने के बाद इत्तेफाकिया हादसा दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। इसका रामघाट पर एक साथ अंतिम संस्कार किया गया था। इसके बाद, वह अपने-अपने घर को चले गए थे। वहीं, मंगलवार को गांव में घटना के कारण चौतरफा सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग जहां-तहां बैठे घटना को लेकर ही चर्चा करते नजर आए। स्वर्गीय छोटेलाल के घर शोक-संवेदना जताने आने वालों सन्नाटे के बीच रोने की आवाज सुनाई देने लगती थीं। महिलाएं करुण क्रंदन करने लगती थीं। दूसरी ओर घर के एक कमरे में अंतिमा गुमसुम पड़ी है। उसकी मां बबना देवी उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं। वह बार-बार अपनी और बेटी की किस्मत को कोस रही थी।