जौनपुर। किसी प्रसव पीड़िता को दर्द उठने पर समय से या सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डेन ऑवर के बीच अस्पताल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली कुछ एंबुलेंस खुद बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग के मानकों के विपरीत एंबुलेंस कंडम स्थिति में सड़कों पर दौड़ रही हैं। मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। यह हम नहीं बल्कि आंकड़े ही कहते हैं। परिवहन विभाग में पंजीकृत 201 एंबुलेंसों में से 26 का फिटनेस फेल होने है। इसके लिए इनके संचालकों को नोटिस भेजा गया है। करीब 10 दिन का समय बीत गया लेकिन अभी तक कई एंबुलेंस संचालक ने कोई संपर्क तक नहीं किया। औसतन हर महीने 40 हजार मरीज एंबुलेंस से जाते हैं।
प्रसव पीड़िता महिलाओं को घर से अस्पताल तक ले जाने, प्रसूताओं का अस्पताल से घर तक ले जाने के लिए 102 नंबर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इनकी संख्या जिले में 50 है। इसी तरह 108 नंबर एंबुलेंस जो सड़क दुर्घटना, बीमार पड़ने सहित सभी तरह के मामलों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाती है इनकी संख्या भी 50 है। यानी कुल 100 की संख्या है। सात एंबुलेंस रिजर्व कोटे में रखे गई हैं। यानी जब कभी इन 100 में से कोई खराब होती है, मरम्मत के लिए जाती है तो रिजर्व एंबुलेंस से बैकअप कराया जाता है। दावा को सभी को ठीक होने का है, लेकिन बृहस्पतिवार को पड़ताल के दौरान शाहगंज में एक एंबुलेंस ऐसी मिली जिसमें पीछे के गेट में हत्था नहीं मिला। उसे लोहे की पत्ती से लॉक किया गया था। पूछने पर उस एंबुलेंस में तैनात ईएमटी ने कोई जवाब नहीं दिया। महराजगंज में कुल तीन एंबुलेंस है, जिसमें एक एंबुलेंस आए दिन खराब रहती है। नाम न छापने की शर्त पर ईएमटी ने बताया कि 12 नवंबर को एक मरीज को ले जाते समय रास्ते में एंबुलेंस खराब हो गई। ऐसे में दूसरी एंबुलेंस को बुलाकर मरीज को घर तक पहुंचाया गया। एंबुलेंस की काफी पुरानी है इसलिए इसमें स्टार्टिंग की समस्या है। साथ ही गाड़ी में तीन स्ट्रेचर होना चाहिए लेकिन इसमें एक ही है। आक्सीजन सिलिंडर दो चाहिए लेकिन एक ही है।
प्राइवेट अस्पतालों की संचालित होती है 100 एंबुलेंस
जौनपुर। जिले में सरकारी एंबुलेंसों का संचालन तो 100 होता है, लेकिन निजी अस्पतालों की तरफ से भी इतने ही एंबुलेंसों का पंजीकरण कराया गया है। परिवहन विभाग से मिले आंकड़े के अनुसार जिले में कुल 201 एंबुलेंसों का पंजीकरण है। इनमें से 26 का फिटनेस फेल है। जिनका फिटनेस फेल है उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
कबाड़ बन गई कई एंबुलेंस
कभी दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस अब कबाड़ की तरह पड़ी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के परिसर झाड़ियों के बीच तीन गाड़ियां खड़ीं हैं। 12 महीने इसी हाल में यहीं पड़ी रहती हैं। विभागीय लोग बताते हैं कि यह गाड़ियां उपयोग में नहीं हैं। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि एंबुलेंस का संचालन शासन स्तर से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है। उनकी नीलामी, संचालन की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। विभाग केवल निगरानी रखता है।
एंबुलेंस में ये जरूरी
- एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार का इंतजाम होना चाहिए।
- ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था होनी चाहिए।
- एंबुलेंस का फिटनेस आवश्यक है, ताकी वह ठीक रहें।
- प्रशिक्षित कर्मी (ईएमटी)की तैनाती एंबुलेंस में होनी चाहिए, चालक भी अनुभवी हो।
पंजीकृत एंबुलेंसों में से 26 का फिटनेस फेल है। फिटनेस कराने के लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है। तय समय के भीतर यदि फिटनेस नहीं कराते हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रमेश चंद्र श्रीवास्तव, एआरटीओ-प्रशासन