जलालपुर। मनुष्य का हृदय संसार रूपी सागर के समान है, जहां अच्छे और बुरे विचार देवता और दानव की भांति संघर्ष करते हैं। भागवत कथा मनुष्य को मोह-माया से दूर रहते हुए सत्कर्म अपनाने की प्रेरणा देती है। ये बातें ताला मझवारा पड़ान गांव में शारदा प्रसाद पांडेय के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को देर शाम काशी से आए कथावाचक पं. निलेश महाराज वेंकटेश ने कही। जीवन मूल्यों का मर्म समझाते हुए उन्होंने कहा कि पाप-पुण्य का फल इसी जीवन में मिलता है। इससे मनुष्य को अपने कर्मों का बोध होता है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य जीवन की त्रिवेणी है। इन मार्गों से व्यक्ति को सही दिशा मिलती है। श्रीकृष्ण की भक्ति पाप विमोचन का मार्ग है। संकट के समय आस्था मनुष्य को दृढ़ बनाती है। कहा कि ध्रुव ने कठोर तप किया और अपनी इच्छा पूरी कर भगवान को प्राप्त किया। इससे सीख मिलती है कि कठिनाइयों को अवसर में बदलना चाहिए। भगवान नरसिंह का अवतार प्रह्लाद की रक्षा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। इससे पूर्व आयोजक पवन पांडेय, अतुल पांडेय समेत पूरे परिवार के लोगों ने व्यास पीठ की आरती और पूजन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ रही।