मछलीशहर। भगवान विष्णु नवंबर माह में पड़ने वाली एकादशी के दिन योग निद्रा का त्याग करेंगे। उनके निद्रा त्याग करते ही 23 नवंबर को तुलसी और शालिग्राम के विवाह के साथ ही शहनाई बजने लगेगी। इसी के साथ मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश भी हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि 23 नवंबर को दिन में 9.28 बजे से रात्रि 08.21 बजे तक मृत्युलोक की भद्रा रहेगी। इसलिए इस दिन रात्रि 08.21 बजे के बाद तुलसी शालिग्राम विवाह संपन्न होगा। श्री अन्नपूर्णा काशी विश्वनाथ पंचांग के अनुसार, विवाह मुहूर्त की कई तिथियां हैं। नवंबर में चार व दिसंबर में आठ तिथियां हैं। 16 दिसंबर को रात्रि एक बजकर एक मिनट पर सूर्य मूल नक्षत्र धनु राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास शुरू हो जाएगा। विवाह मुहूर्त स्थगित हो जायेंगे। 15 जनवरी 2024 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास समाप्त हो जायेगा। जनवरी में कुल नौ दिन, फरवरी में 18 व मार्च में छह दिन विवाह की लग्न की अच्छी है। मार्च के बाद यानी होली के बाद अगले संवत का पंचांग आएगा।
इस महीने में इस तारीख को बजेगी शहनाई..
नवंबर: 23, 24, 28, 29
दिसंबर: 3, 4, 5, 6, 7, 13, 14, 15
जनवरी: 16, 17, 21, 22, 27, 28, 29, 30, 31
फरवरी : 1, 2, 3, 4, 6, 7, 8, 12, 13, 17, 18, 19, 23, 24, 25, 26, 27, 29
मार्च : 2, 4, 5, 6, 11, 12
लग्न के साथ ही यह भी है जरूरी
कर्मकांड के विद्वान पंडित मुरारी श्याम पांडेय का कहना है कि विवाह मुहूर्त में नक्षत्र बल प्राप्त हो, मृत्युबाण व भद्रा न हो तथा देर रात्रि तक की लग्न हो, तो वह लग्न श्रेष्ठ मानी जाती है। वर वधू के उज्जवल भविष्य के लिये दोनों के कुंडलियो का मेलापक आवश्यक है। भावी दंपति के खुशहाल जीवन के लिये राशि मैत्री, भकूट, गण, नाड़ी आदि का मिलान जरूरी होता है।