वादी पक्ष जान बचाकर घर में भागा। आरोपी घर में घुस गए। भाई नागेंद्र और अरविंद को बाहर खींच लाए और घसीटते हुए अपने घर की तरफ ले जाने लगे। मनोज के ललकारने पर अर्जुन की लाइसेंसी राइफल से राजेंद्र ने नागेंद्र को गोली मार दी। इसके बाद अर्जुन ने राजेंद्र से राइफल छीनकर अरविंद को गोली मारी। आसपास के लोगों ने बीचबचाव किया। आरोपी असलहा लहराते और हवाई फायरिंग करते हुए फरार हो गए। नागेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। घायल अरविंद को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उधर, शैलेश उपाध्याय के प्रार्थना पत्र पर कोर्ट के आदेश से सुरेंद्र उपाध्याय, देवेंद्र उपाध्याय, अरविंद उपाध्याय के खिलाफ 18 सितंबर 2013 को एफआईआर दर्ज हुई कि उसी दिन पड़ोसी अरविंद, सुरेंद्र, देवेंद्र, नागेंद्र, रोहित, दीपक, पुष्पा राड, बांस, कट्टा, ईंट लेकर उनके घर में घुसकर घर की औरतों के गहने छीनते हुए उन्हें मारने लगे।
अरविंद ने चाचा अर्जुन के सिर पर राॅड से मारा। नागेंद्र ने उनके ऊपर कट्टे से फायर किया। अर्जुन झुक गए और गोली अरविंद की जांघ में लगी। इसके बाद सुरेंद्र ने नागेंद्र से कट्टा छीन लिया। हाथापाई में सुरेंद्र ने फायर कर दिया और गोली नागेंद्र को लगी और उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की। पहले मुकदमे में नारायण दास की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने राजदेव, कमला, अर्जुन, भीम, विनोद, महंत, राजेंद्र को हत्या के जुर्म में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने पत्रावली में साक्ष्य न मिलने के कारण अंजना, रिंकी, आशा, वंदना व गीता को दोषमुक्त कर दिया। क्रॉस केस में कोर्ट ने सुरेंद्र और अरविंद उपाध्याय को मारपीट का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।