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मनरेगा मजदूरों को काम देने में सात ब्लाक फिसड्डी

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जौनपुर। वर्ष में सौ दिन काम की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है। यहां जॉबकार्डधारी परिवारों को काम उपलब्ध कराने में ग्राम पंचायतें फिसड्डी साबित हो रही हैं। इस वर्ष अब तक सिर्फ 1245 परिवारों को ही सौ दिन काम मिल पाया है। सात ब्लाकों की स्थिति बेहद खराब है। यहां ऐसे परिवारों की संख्या दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। सिकरारा ब्लाक में ऐसा कोई परिवार नहीं है, जिसे सौ दिन काम दिया जा सका हो। केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली इस योजना का यह हश्र है तो अन्य के अंजाम का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मजदूरों का गांव से पलायन रोकने और उनके भरण-पोषण के लिए वर्ष में कम से कम सौ दिन काम की गारंटी देने का कानून लागू है। इसके तहत काम देने के लिए अब तक जिले में कुल तीन लाख 50 हजार लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है। इसमें से चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक एक लाख 20 हजार जॉब कार्ड धारकों को काम दिया गया है। लेकिन इसमें से मात्र 1245 मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम दिया गया है। मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम देने के ब्लाकवार आंकड़े पर गौर करें तो जिले के 21 ब्लाकों में सात ब्लाक ऐसे हैं, जो मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम देने में दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए हैं। इसमें बक्शा में 10, बरसठी में आठ, , धर्मापुर में 10, जलालपुर में सात, मड़ियाहूं में पांच, रामपुर में चार मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम दिया गया है। जबकि सिकरारा में एक भी मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम नहीं दिया गया है। इसके अलावा शेष 14 ब्लाकों में 10 -10 से अधिक मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम दिया गया है।
2.30 लाख मनरेगा मजदूरों को नहीं मिला काम
जौनपुर। जिले में मनरेगा योजना के तहत कुल तीन लाख 50 हजार जॉबकार्ड धारक हैं। चालू वित्तीय वर्ष में दो लाख 30 हजार मनरेगा मजदूरों को एक भी दिन का काम नहीं मिला है। चालू वित्तीय वर्ष के नौ माह गुजरने के बाद मात्र एक लाख 20 हजार मनरेगा मजदूरों को काम दिया गया है।
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