लो-वोल्टेज की समस्या से उपभोक्ताओं को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। शासन ने मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया में 1006 ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस कार्य पर 28.69 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
छोटे ट्रांसफाॅर्मरों को उच्च क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों से बदला जाएगा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु और निर्बाध हो सकेगी। मुख्य अभियंता (वितरण) इंजीनियर रामबाबू ने बताया कि लंबे समय से कई क्षेत्रों में ट्रांसफाॅर्मरों पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार पड़ रहा था। इसके कारण बार-बार फ्यूज उड़ने, ट्रांसफाॅर्मर जलने, लो-वोल्टेज और अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को देखते हुए शासन को क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
उन्होंने बताया कि 25 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की जगह 63 केवीए और 63 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की जगह 100 केवीए के नए ट्रांसफाॅर्मर स्थापित करने का काम विद्युत निगम के वर्कशॉप के माध्यम से कराया जाएगा। इसके अलावा अन्य क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता वृद्धि संबंधित वितरण खंड स्तर से कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सबसे अधिक बलिया में 350 ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। जिस पर 11.53 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आजमगढ़ में 308 ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाने के लिए 8.46 करोड़ रुपये और मऊ में 348 ट्रांसफाॅर्मरों के लिए 8.69 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सभी कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे।
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क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा होने के बाद ओवरलोडिंग की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी। इससे ट्रांसफाॅर्मरों के बार-बार खराब होने की घटनाएं कम होंगी और लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिलेगी। - इं. रामबाबू, मुख्य अभियंता वितरण।