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आत्म बोध कराने वाली भाषा है संस्कृत : प्रो. हरिप्रसाद

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सुजानगंज। संस्कृत दिवस के अवसर पर श्री गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय की ओर से रविवार को फेसबुक पेज पर आयोजित तीसरे व्याख्यान में संस्कृत की महत्ता पर चर्चा हुई। इस दौरान संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के तुलनात्मक धर्म-दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि आत्म बोध के लिए संस्कृत भाषा आवश्यक है। संस्कृत भाषा के ज्ञान मात्र से नैतिकता, धर्म, कर्म एवं ज्ञान जैसे तत्वों का ज्ञान हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्रावण पूर्णिमा के दिन को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिस तरह रक्षाबंधन स्नेह, प्रेम और समर्पण का पर्व है, उसी तरह संस्कृत भाषा भी इन गुणों से परिपूर्ण है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यदि हम संस्कृत एवं संस्कृति का पालन करते हैं तो एक श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को सिद्ध कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के व्याकरण विभागाध्यक्ष पंडित विनोद कुमार तिवारी, प्राध्यापक पंडित शिवानंद चतुर्वेदी, जितेंद्र सिंह, इंदु प्रकाश चतुर्वेदी, नवीन कुमार मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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