जिले में मौजूद पुरातात्विक महत्व की दर्जन भर से अधिक धरोहरों को संरक्षण की दरकार है। ऐतिहासिक शाही किला की दीवारें दरक रही हैं। शाही पुल पर पीपल उग आए हैं। देख रेख के अभाव में इन ऐतिहासिक इमारतों का अस्तित्व खतरे में है। लेकिन जिम्मेदार विभाग इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए संजीदा नहीं हैं। विश्व धरोहर दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने जिले की कुछ पुरातात्विक महत्व की इमारतों की पड़ताल की।
जौनपुर का शाही किला जिले की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख इमारत है। वर्ष 1362 में इस किले का निर्माण फिरोज शाह ने कराया था। शाही किला के अलावा शाही पुल, अटाला मस्जिद, लाल दरवाजा, झझरी मस्जिद, चार अंगुल की मस्जिद, बड़ी मस्जिद समेत कई अन्य ऐतिहासिक इमारतों का अस्तित्व संकट में हैं। शाही किला की दीवारें दरक रही हैं। गोमती नदी के तट पर स्थित इस दुर्ग की बुर्जियों का जीर्णोद्धार का काम कोई चार साल पहले शुरू किया गया था लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका। किले के अंदर की कुछ दीवारें जहां जर्जर हो गई हैं वहां सुरक्षा के लिहाज से कटीले तार से घेर दिया गया है लेकिन उसका जीर्णोद्धार अभी नहीं कराया गया।
शाही पुल की दीवारों पर कई जगह पीपल और पाकड़ के पेड़ उग आए हैं जो इसकी दीवारों को कमजोर कर रहे हैं। लेकिन पुरातात्विक महत्व की इन इमारतों का कोई सुधि नहीं ले रहा।प्रभारी अधिकारी शाही किला हरिशचंद्र का कहना है कि शाही किले के जीर्णोद्धार के लिए जितना बजट मिला था वह कम पड़ गया। फिर से बजट की डिमांड की गई है। धन मिलने पर मरम्मत का काम पूरा करा दिया जाएगा।