जौनपुर। पंडित रूपनारायण त्रिपाठी ने आधी शताब्दी तक कविता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने हिन्दी काव्य-मंचों को गरिमापूर्ण बनाए रखने में अतुलनीय योगदान किया। यह बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने शनिवार की रात जगत नारायण इंटर काॅलेज जगतगंज के परिसर में कही।
रूप सेवा संस्थान एवं उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में यशस्वी रचनाकार पत्रकार महाकवि पं. रूप नारायण त्रिपाठी की 34 वीं पुण्यतिथि पावन स्मृति दिवस के रूप में मनाई गई। मुख्य अतिथि प्रोफेसर राममोहन पाठक ने कहा कि पंडित रूप नारायण त्रिपाठी ने हिंदी कविता को भारतीय संस्कृति का रंग देने वाले अग्रणी कवि थे। विशिष्ट अतिथि अंतर राष्ट्रीय कवि-साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि पं. रूप नारायण मात्र साहित्यकार ही नहीं थे वे साहित्यकारों की नई पीढ़ियों की परवरिश करने वाले थे। इस मौके पर राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव, विशेष सचिव उच्च शिक्षा डाॅ. अखिलेश मिश्र, पूर्व एमएलसी कुंवर वीरेंद्र सिंह, प्रोफेसर मनोज मिश्रा, पूर्व प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।